
बच्चों को अंगूरों से अनेक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं - जैसे की एंटीऑक्सिडेंट की आपूर्ति, central nervous system की सुरक्षा है। अंगूर बच्चों में natural laxative के रूप में भी काम करती है। यह पचाने में आसान है और श्वसन रोगों का सुधर, रक्त की मात्रा में सुधार और जिगर की रक्षा करता है।
अगर आप ६ महीने के शिशु को अंगूर खिलाना चहते हैं तो आप उसे अंगूर की प्यूरी भी बना के दे सकते हैं।
बच्चों के लिए अंगूर के स्वास्थ्य लाभ
अंगूर में घनिष्ट मात्र में पाशक तत्त्व होते हैं जो बढते बच्चों के शारीरक और बौद्धिक विकास के लिए जरुरी है। बच्चों को साबूत अंगूर ना दें बल्कि अंगूर को दो टुकड़ों में चाकू से कट के दें। इससे बच्चों के गले में अंगूर के फसने का खतरा नहीं रहता। बच्चों को अंगूर देने से पहले आप अंगूर के छिलके को निकल के भी दे सकती हैं। सही तरीके से आप अंगूर के छिलकों को बहुत आसानी से और तुरंत निकल सकती हैं।
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एक कप अंगूर में विटामिन मी मात्र
- विटामिन A – 92 IU
- विटामिन C – 3.7 mg
- विटामिन B1 (thiamine) – .08 mg
- विटामिन B2 (riboflavin) – .05 mg
- Niacin – .27 mg
- फोलेट – 4 mcg
- इसमें और भी तरह विटामिन्स कम मात्रा मैं विधमान है
एक कप अंगूर में मिनरल (खनिज तत्वों) की मात्र
- पोटैशियम – 176 mg
- फॉस्फोरस – 9 mg
- मैग्नीशियम – 5 mg
- कैल्शियम – 13 mg
- सोडियम – 2 mg
- आयरन – .27 mg
- बहुत थड़ी मात्रा में इसमें मैनगनीज, कॉपर और जिंक भी पाया जाता है।
माना जाता है कि Middle East में 6 से 8 हजार साल पहले अंगूर की खेती की जाती थी। यहां से अंगूर एशिया, मिस्र, यूरोप और अमेरिका के अन्य हिस्सों में फैला। फिलहाल भारत के कई राज्यों में अंगूर का उत्पादन होता है।
क्या बच्चों को अंगूर देना सुरक्षित है?
हाँ, बच्चे को अंगूर देना सुरक्षित है। लेकिन, कुछ बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता है। केवल मसले (mash) किए हुए अंगूर को बच्चे को दिया जाना चाहिए। खड़ा अंगूर न दें क्योंकि बच्चों के गले में फसने का और इससे घुटन होने का बड़ा खतरा होता है। अगर जरुरी बातों का ख्याल रखें तो आप अपने बच्चे को 6-8 महीने की उम्र से ही अंगूर देना प्रारंभ कर सकती हैं।
बच्चों को अंगूर देते समय इन बातों का ख्याल रखें
- पूरा साबुत अंगूर न दें: बच्चों को पूरा अंगूर देना, विशेषकर जिनके दांत नहीं हैं, हानिकारक हो सकता है। अंगूर से घुटन का खतरा रहता है क्योंकि वे बच्चों के गले में फंस सकते हैं। इसके बजाय, बच्चों को देते वक्त अंगूर को मैश करें और शिशुओं को अंगूर का pulp दें। अंगूर को मैशिंग करते वक्त बीज हटा दें। बच्चों को पूरे बीज को निगलने में समस्या हो सकती है।
- बच्चों को अंगूर का juice न दें: अक्सर, कुछ माता-पिता सोचते हैं कि juice देना, फलों का पल्प देने से बेहतर होता है। बच्चों के चिकित्सक बच्चों को फलों का juice देने से माता-पिता को मना करते हैं। आम तौर पर, फलों के juice बहुत मीठे होते हैं और बच्चों को उस मीठे स्वाद से लगाव हो जाता है, ऐसा होने पे बच्चे दुसरे कम मीठे आहार खाने में आना कानी करते हैं।

बच्चों को अंगूर से होने वाले स्वास्थ्य लाभ - शिशु में अंगूर के फायेदे
Antioxidants की आपूर्ति
बच्चे के आहार और वजन में बढ़ने के अनुपात को अगर आप देखें तो आपको अंदाजा मिल जायेगा की बच्चों को अधिक आहार खाने की आवश्यकता है। बढते बच्चों को ज्यादा आहार की आवश्यकता है। जरुरी पोषक तत्वों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए बच्चों का शारीर तजी से आहार को metabolize करता है। मगर तेज़ मेटाबोलिज्म की वजह से बच्चे के शारीर में free radicals का उत्पादन भी तेज़ हो जाता है। Free radicals बच्चों के DNA को को प्रभावित करता है और उसे नुकसान पहुंचता है। अंगूर में प्रचुर मात्र में Antioxidants होता है जो free radicals को बांध देता है और बच्चों के DNA को प्रभावित करने से रूकता है। अंगूर केवल बच्चों के भूक को ही शांत नहीं करता, उन्हें केवल उर्जा ही नहीं देता, बल्कि बच्चों के शारीर में पैदा हो रहे free radicals से भी लड़ता है।
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का संरक्षण (Protection of central nervous system):
शिशुओं में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र एक विकासशील प्रक्रिया है। जिस तरह आपका बच्चा बढ़ रहा है, उसका तंत्रिका तंत्र भी विकसित हो रहा है। जैसे-जैसे बच्चा उम्र में बढ़ता है, नए न्यूरॉन्स के रूप और नए तंत्रिका कनेक्शन बनते हैं। यह एक नाजुक संतुलन है जो भविष्य में बच्चे की स्मृति और बुद्धि को प्रभावित करता है। बच्चों को अंगूर देकर आप उनके न्यूरॉन्स को क्षति से बचा सकते है और उनके मस्तिष्क की अच्छी स्वस्थ्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
प्राकृतिक laxative के रूप में कार्य (Acts as a natural laxative)
अंगूरों में काफी मात्रा में dietary fiber होते हैं। यह dietary fiber पानी को अवशोषित कर मल को भारी मगर नरम बनाता हैं जिससे bowel movements बहुत आसानी से होती हैं।
आसानी से पचने योग्य (Easily digestible)
अंगूर उन कुछ फलों में से एक हैं जो बहुत आसानी से बच्चों को digest हो जाते हैं। जब आपका बच्चा अपच से पीड़ित है तो अंगूर एक उपयुक्त फल है। बच्चे को अंगूर खिलाने से उसके पेट की acidity कम होती है।
श्वसन रोगों के लिए उपाय (Remedy for respiratory diseases)
बच्चों और शिशुओं में शीतल रोगों से संक्रमित होने की सम्भावना ज्यादा होती है जैसे की आम सर्दी, खांसी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस। अपने बच्चे को अंगूर देना अस्थमा जैसे रोगों के लिए एक अच्छा उपाय है।
रक्त की गुणवत्ता और रक्त की संख्या में सुधार (Improving blood quality and blood count)
रक्त की गुणवत्ता हीमोग्लोबिन के स्तर को दर्शाती है और रक्त गणना लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या को दर्शाती है। अंगूरों को नियमित रूप से शिशुओं और बच्च कों देने से उनमे हीमोग्लोबिन का स्तर बढता है और लाल रक्त कोशिकाओं में सुधार होता है।
जिगर को उत्तेजित करता है (Stimulates liver)
अंगूर यकृत के उत्तेजक के रूप में कार्य करते हैं और इसे ठीक कर देते हैं। जिगर की उत्तेजना से जिगर की गतिविधि और पित्त स्राव में वृद्धि होती है। पित्त स्राव पाचन में एक आवश्यक कदम है