Category: बच्चों की परवरिश

पोक्सो एक्ट (POCSO) क्या है - सम्पूर्ण जानकारी

By: Vandana Srivastava | 9 min read

पोक्सो एक्ट बच्चों पे होने वाले यौन शोषण तथा लैंगिक अपराधों से उनको सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण अधिनियम है। 2012 में लागु हुआ यह संरक्षण अधिनियम एवं नियम, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों पे हो रहे लैंगिक अपराधों पे अंकुश लगाने के लिए किया गया है। Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO) का उल्लेख सेक्शन 45 के सब- सेक्शन (2) के खंड “क” में मिलता है। इस अधिनियम के अंतर्गत 12 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ यौन उत्पीडन करने वाले दोषी को मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान निर्धारित किया गया है।

पोक्सो एक्ट (POCSO) क्या है - सम्पूर्ण जानकारी

पोक्सो एक्ट का पूरा नाम “The protection of children from sexual offences act”  है।           

लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम एवं नियम ,2012 द्वारा 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए यह नियम बनाया गया हैं , इसीको संक्षिप्त रूप से पोक्सो एक्ट कहा जाता हैं।इसका उल्लेख सेक्शन 45 के सब- सेक्शन (2) के खंड “क” में है।

इस लेख में

  1. पोक्सो एक्ट और बच्चों का संरक्षण
  2. पोक्सो एक्ट के मुख्या बिंदु
  3. पोक्सो एक्ट और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  4. पोक्सो एक्ट की विशेषताएं
  5. पोक्सो एक्ट का दायरा
  6. पोक्सो एक्ट में सजा का प्रावधान
  7. अपराध से सम्बंधित जानकारी और बच्चों की जिमेदारी
  8. मेडिकल जाँच तथा विशेषज्ञ की सहायता
  9. बच्चों की सुरक्षा और माँ-बाप की जिमेदारी

पोक्सो एक्ट और बच्चों का संरक्षण 

लैंगिक हमला , लैंगिक उत्पीड़न और अश्लील साहित्य के अपराधों से बालकों का संरक्षण करने और ऐसे अपराधों का विचारण करने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना तथा उनसे सम्बंधित विषयों के लिए उपबंध करने के लिए यह अधिनियम बनाया गया हैं।

पोक्सो एक्ट और बच्चों का संरक्षण

संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा बालको के अधिकारों से सम्बंधित कांफ्रेंस में बालकों के सर्वोत्तम हित को सुरक्षित करने के लिए सभी राज्यों द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया था ,जिसे भारत सरकार द्वारा दिनाक 11 दिसंबर 1992 को स्वीकार किया गया हैं।

बालक के उचित विकास के लिए यह आवश्यक हैं की प्रत्येक व्यक्ति द्वारा उसकी निजता (प्राइवेसी) और गोपनीयता के अधिकार का सभी प्रकार से सम्मान करते हुए तथा किसी न्यायिक प्रक्रिया के सभी उपायों के माध्यम से बालको को संरक्षण दिया जाए जिससे बालक के शारीरिक स्वास्थय  ,भावात्मक ,बौद्धिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित किया जाए। 

बालको  के लैंगिक शोषण और लैंगिक दुरूपयोग जघन्य अपराध हैं। उनपर प्रभावीरूप से कारवाही होनी चाहिए।     

पोक्सो एक्ट के मुख्या बिंदु

पोक्सो एक्ट के मुख्या बिंदु 

  • इस "अधिनियम" से लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम एवं नियम ,2012 का 32 अभिप्रेत हैं।
  • इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर हैं।
  • यह 9 नवंबर से 2012 से प्रवृत होगा।
  • देश में बच्चियों के साथ बढ़ती दरिन्दिगी के लिए इस एक्ट में बदलाव किया गया हैं ,जिसके तहत 12 साल तक की लड़की से रेप के दोषियों को मत्यु - दंड दिया जाएगा सरकार की ओर से रखे गए इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से 28 अप्रैल 2018 को मंजूरी मिल गई हैं।

इस अधिनियम के द्वारा 7 और 8 के तहत वे मामले रजिस्टर किये जाते हैं ,जिनमे बच्चो का यौन - शोषण किया जाता हैं।वे शोषण किस सीमा तक हैं उसपर अपराध सिद्ध किया जाता हैं।अपराध सिद्ध होने की दशा में 5 से 7 साल की सजा और जुर्माना हो सकता हैं।

पोक्सो एक्ट और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में 26 अप्रैल को ट्वीट कर कहा की सरकार हमेशा जेंडर न्यूटल कानून के विकास के लिए प्रयास-रत हैं। इस तरह यौन शोषण का शिकार हो रहे बच्चों को न्याय मिल सकेगा। 

पोक्सो एक्ट और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

फिल्म मेकर  दारीवाला ने एक याचिका में कहा की लड़को के यौन शोषण को नजरअंदाज किया जा रहा हैं। इसपर मेनका गाँधी ने जवाब दिया की इस मामले में स्टडी की जा रही हैं और इस सम्बन्ध में पाया गया की 53 .2 % से ज्यादा बच्चे यौन शोषण के शिकार हुए ,जिनमे से 52 .9 % लड़के थे।

बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन चाइल्ड राइट्स एंड यू के मुताबिक भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन अपराध का शिकार बनता हैं और पिछले दस सालो में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध में अत्यधिक वृद्धि हुई हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश ,महाराष्ट्र ,पश्चिम बंगाल और दिल्ली में ये अपराध हैं। 

पोक्सो एक्ट की विशेषताएं

पोक्सो एक्ट की विशेषताएं

  • नाबालिग (18 साल से कम उम्र के बच्चे ) बच्चों से किसी भी तरह का सेक्सुअल बर्ताव इस कानून के दायरे में आता है। यह एक्ट लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता हैं।
  • इस एक्ट के तहत बच्चों को सेक्सुअल असाल्ट ,सेक्सुअल हरैस्मेंट और पोर्न ग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता हैं।
  • इस कानून के तहत अलग - अलग अपराध के लिए अलग -अलग सजा और जुर्माना तय किया गया हैं।
  • इस कानून के तहत सभी अपराधों की सुनवाई एक विशेष न्यायालय द्वारा अकेले में कमरे के सामने बच्चो के अभिभावक ,वकील ,शिक्षक या जिन पर वह भरोसा करता हैं ,उनकी उपस्थिति में सुनवाई का प्रावधान हैं। 

पोक्सो एक्ट का दायरा

पोक्सो एक्ट का दायरा 

  • धारा 3 ,5 ,9 ,8 ,11 और 4 के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी भी बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में चोट पहुंचाता हैं ,जिससे उसका सेक्सुअल हरैस्मेंट होता हैं ,तो वह व्यक्ति सजा का भागी होगा।
  • अगर अपराधी ने कुछ ऐसा अपराध किया हैं जो की बाल अपराध कानून के अलावा ,किसी दूसरे कानून में भी अपराध हाँ तो अपराधी को सजा उस कानून के तहत होगी जो सबसे सख्त हो।
  • अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे के प्राइवेट पार्ट को टच करता हैं या अपने प्राइवेट पार्ट को बच्चे से टच कराता हैं तो धारा 8 के तहत सजा होगी।
  • अगरकोई व्यक्ति गलत नियत से बच्चों के सामने गन्दी हरकते करता हैं या ऐसा करने को बच्चे से कहता हैं तो तीन साल से लेकर उम्र कैद का प्रावधान हैं।
  • यदि समूह में कई व्यक्ति मिलकर किसी बच्चे के साथ दुष्कर्म करते हैं ,तो प्रत्येक व्यक्ति सजा का भागी होगा।

पोक्सो एक्ट में सजा का प्रावधान

पोक्सो एक्ट में सजा का प्रावधान 

  • 12 साल से कम उम्र के बच्चियों से रेप के मामले में मौत की सजा होगी।
  • 16 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामले में सजा 10 साल से बढाकर 20 साल कर दिया गया हैं।
  • इस एक्ट में यह भी कहा गया हैं की बच्चे के यौन शोषण का मामला घटना घटित होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर निपटाया जाना चाहिए।

अपराध से सम्बंधित जानकारी और बच्चों की जिमेदारी

अपराध से सम्बंधित जानकारी और बच्चों की जिमेदारी 

  • यदि कोई यह जानता हैं की किसी बच्चे का यौन शोषण हुआ हैं तो इसकी रिपोर्ट नजदीकी थाने में तुरंत दे नहीं तो उससे 6 महीने का जेल और जुर्माना लगाया जा सकता हैं।
  • यह एक्ट बाल संरक्षक की जिम्मेदारी पुलिस को सौपता हैं ,इसमें पुलिस को बच्चे के देख - भाल की जिम्मेदारी और तुरंत चिकित्सा तथा उपचार और बच्चे को आश्रय -गृह में रखने की जिम्मेदारी देता हैं।
  • पुलिस की यह जिम्मेदारी बनती हैं की मामले को 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति की निगरानी में बच्चे की सुरक्षा के लिए जरुरी कदम उठा सके।

मेडिकल जाँच तथा विशेषज्ञ की सहायता

मेडिकल जाँच तथा विशेषज्ञ की सहायता 

  • इस एक्ट के तहत बच्ची के मेडिकल जांच महिला चिकित्सक द्वारा ही की जाए।
  • यदि पीड़ित बच्चा विक्लांग हैं और मानसिक या शारीरिक रूप से बीमार हैं तो उसकी गवाही के लिए उसके परिवार के सदस्य ,अनुवादक या विशेष शिक्षक की सहायता लेनी चाहिए।
  • इसमें खुद को निर्दोष साबित करने का दायित्व अभियुक्त पर होता हैं।
  • जो लोग यौन प्रयोजन के लिए बच्चों का व्यापार करते है , उनके लिए भी सख्त सजा हैं।  
  • यदि कोई पति या पत्नी 18 साल से कम उम्र के जीवनसाथी के साथ बिना सहमति यौन कृत करता हैं तो उस पर भी मुकदमा चलाया जा सकता हैं।   

बच्चों की सुरक्षा और माँ-बाप की जिमेदारी

बच्चों की सुरक्षा और माँ-बाप की जिमेदारी 

कठुआ और उन्नाव केस से पूरा देश हिल गया तथा शर्मसार हुआ। पूरे देश वासियों के मन में आक्रोश हैं।ऐसी ही प्रति दिन अनगिनत घटनाए हो रही हैं ,जिससे हमारे बच्चे आहत हो रहे हैं और तो और उनका अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा हैं।

ऐसे मे आप सभी अभिभावकों और माता -पिता की जिम्मेदरी बनती हैं की आप अपने बच्चे का पूरा ध्यान दे। वो किसके साथ खेलता हैं ,किसके साथ अपना पूरा समय व्यतीत करता हैं और उसके मित्र कौन हैं क्योकि इसमें ज्यादातर घटनाए अपने परिचितों द्वारा ही अंजाम दी जाती हैं।

बच्चा अबोध होता और वह किसी की भी बातों और बहकावे में आ जाता है।  वह संकोचवश अपने माता- पिता से सारी बाते कह भी नहीं पाता हैं। अतः अपने बच्चों से मित्रवत व्यवहार करे तथा उसे सुरक्षा प्रदान  करे।पोक्सो एक्ट बालको के संरक्षण के लिए ही बनाया गया हैं।

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