
ड्यूक यूनिवर्सिटी (Duke University) की अगुवाई में चली चार साल लम्बी शोध में यह नतीजा सामने आया की परिवार के दुसरे सदस्यौं का उग्र स्वाभाव, उसी घर में रहने वाले दुसरे छोटे बच्चों के स्वाभाव को प्रभावित करता है और उनमे भी उग्र स्वाभाव को प्रोत्साहित करता है।
शोध में दुनिया के नौ देशों के 12 अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों के 1,299 बच्चों और उनके माता-पिता के विश्लेषण के बाद यह तथ्य सामने आया।
अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों के बच्चे में व्यवहारिक होने की छमता भिन भिन होती है। जिन सांस्कृतिक समूहों में बड़े ज्यादा सतर्क होते हैं उन समूहों के बच्चे भी व्याहारिक होने में सतर्कता बरतते हैं और यह व्यहार उनमे आक्रामक व्यवहार पैदा करती है।
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अध्ययन के मुख्य लेखक केनेथ ए. डॉज (Kenneth A. Dodge) ने कहा कि उनके अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकला कि कुछ संस्कृतियां बच्चों को इस तरह से रक्षात्मक बनने के लिए उग्र स्वाभाव अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों के बच्चों में यह प्रवृति अलग अलग है। और इन मतभेदों का कारण ही कि कुछ संस्कृतियों के बच्चे अन्य संस्कृतियों की तुलना में अधिक आक्रामक व्यहार करते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों को अधिक सौहार्दपूर्ण और अधिक क्षमा और कम रक्षात्मक बनाने के लिए कुछ संस्कृतियों को ज्यादा सामाजिककरण होने की आवश्यकता है।
इस शोध में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी इन देशों से थे - जिनान, चीन; मेडेलिन, कोलंबिया; नैप्लस; रोम, इटली; ज़रक़ा, जोर्डा ; लुओ ट्राइब ऑफ़ किसुमु, केन्या; मनीला, फिलीपींस; त्रोलहट्टन/वनरसबोर्ग, स्वीडन; चिआंग मई, थाईलैंड; और डरहम, N.C., और अमेरिका में (जिसमें अफ्रीकी-अमेरिकी, यूरोपीय अमेरिकी और हिस्पैनिक समुदाय शामिल थे)। अध्ययन की शुरुआत में बच्चों की उम्र 8 वर्ष थी।