गलतियां जो पेरेंटस करते हैं बच्चों की परवरिश में

गलतियों से सीखो। उनको दोहराओ मत। ऐसी ही कुछ गलतियां हैं। जो अक्सर माता-पिता करते हैं बच्चे को अनुशासित बनाने में।

गलतियां किस मां-बाप से नहीं होती हैं। हर कोई इन्हीं से सीखता है। जब बात परवरिश की हो तो ये तो आम बात है। क्योंकि आप हमेशा पेरेंटस नहीं होते हैं। वही सीख हम बच्चों को भी देते है कि गलतियों से सीखो। उनको दोहराओ मत। ऐसी ही कुछ गलतियां हैं। जो अक्सर माता-पिता करते हैं बच्चे को अनुशासित बनाने में।

समय के पाबंद बने

बच्चे को अक्सर ये सलाह दे कि ये नहीं करना है वो नहीं करना है। फिर खुद ही वो नियम तोड़ देते हैं। जोकि गलत है इसका बच्चे पर भी गलत असर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर अगर ये तय किया है कि रात को 8 बजे के बाद खेलना मना है। तो ये नियम खुद पर भी लागू करें।

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झूठ बोलना

अक्सर हम ये सीखाते हैं कि झूठ नहीं बोलना चाहिए। मगर खुद इस गलती से बाज नहीं आते हैं। कई बार बच्चों को कोई सामान दिलाना हो या बाहर जाना हो हम झूठ बोल देते हैं। ये कहते हुए कि वो सामान खराब है या बाहर नहीं जा सकते क्योंकि बाहर मार्केट बंद है। उसे बाद जैसे वो सामान बच्चा किसी और के पास देखता है वो समझ जाता कि आप झूठ बोल रहे थे।

खोने का डर

बच्चे को पालना कोई आसान काम नहीं है। खास करके जब एक से ज्यादा बच्चे हों। ऐसे में कई बार बच्चों किसी चीज से बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। कोई गलती अगर हो भी जाए बच्चे से तो उनको उससे भूलने की सलाह दें। इसके साथ भी चीजों से बाहर निकलें।

बात सीधी करें

बच्चे को लेक्चर देने के बजाय उनसे सीधी बात करें। उसे वो आसानी से समझ जाएंगे। अक्सर हम बच्चों को खुद ज्यादा ही समझाने लगते हैं। जिसकी असल में जरूरत नहीं होती है। तो बच्चों को कम शब्द में ही समझाऐं। उसके लिए खास करके खाना खाने के पहले हाथ धुलना है ये कहना ही काफी है। बहुत ज्यादा समझाने की जरूरत नही है।