
दूध बच्चों के लिए एक संपूर्ण आहार है। इसलिए क्यूंकि ये बच्चे को सभी पोषक तत्त्व प्रदान करता है जो उसके बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए बहुत जरुरी है।
बच्चा जन्म के कुछ महीनों तक सिर्फ माँ का ही दूध पीता है और कुछ नहीं। इस दौरान उसमे कोई भी विटामिन या मिनरल की कमी नहीं होती है।
क्यूंकि दूध वो सब प्रदान करता है जो एक बच्चे के शरीस को आवश्यक है। दूध कुदरत का एक अनमोल वरदान है और चमत्कार भी।
इस लेख में आप सीखेंगे - You will read in this article
- ~~~#1^^^ग्लाक्टोसेमिया या अतिदुग्धशर्करा (दूध से एलर्जी क्या है?)@@@
- ~~~#2^^^दूध से एलर्जी के लक्षण@@@
- ~~~#3^^^जाँच या परीक्षण@@@
- ~~~#4^^^दूध से एलर्जी के कारण@@@
- ~~~#5^^^घरेलु उपचार@@@
- ~~~#6^^^Video: अंडे से एलर्जी के लक्षण@@@
anchorlink[1]anchorclose ग्लाक्टोसेमिया या अतिदुग्धशर्करा - Lactose intolerance or allergy from milk
लेकिन यही माँ का दूध या कोई और भी दूध बच्चा न पी पाए तो यह एक घबराने का विषय बन जाता है कि उसका पेट कैसे भरेगा। हालाँकि ऐसा बहुत कम बच्चों में पाया जाता है कि उसे दूध से ही एलर्जी हो जाए। दूध से होने वाली एलर्जी को ग्लाक्टोसेमिया या अतिदुग्धशर्करा कहा जाता है।
हम अपने बच्चे को शक्तिवर्धक बनाने के लिए उसको अधिक से अधिक दूध पिलाना चाहते हैं लेकिन कभी-कभी आप का बच्चा उस दूध में मौजूद लैक्टोज़ शुगर को पचा नहीं पाता है और लैक्टोज़ इंटॉलेन्स का शिकार हो जाता है जिसकी वजह से उसे उलटी , दस्त व गैस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ बच्चों में दूध में मौजूद दूध से एलर्जी होती है जिसे हम और आप पहचान नहीं पाते हैं और त्वचा में इसके रिएक्शन होने लगता है। कभी- कभी स्थिति यह हो जाती है कि बच्चे को पित्ती, खाँसी, त्वचा पर लाल चकत्ते, बेहोशी या घरघराहट महसूस होती है।
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anchorlink[2]anchorclose दूध से एलर्जी के लक्षण - Symptoms of Lactose intolerance in Hindi
दूध से एलर्जी होने पर बच्चे के अंदर कुछ बदलाव होने लगते हैं और ये लक्षण दिखने लगते हैं-
- बच्चे का लिवर बढ़ने लगता है।
- लिवर की कोशिकायें एवं उसके सेल्स में भी खराबी आने लगती है।
- उल्टियां होना इस रोग का प्रमुख लक्षण है।
- त्वचा का रंग पीला पड़ने लगता है और उसकी आँखें भी पीली नज़र आने लगती हैं।
- बच्चा खाना- पीना छोड़ देता है और उसके अंदर कमजोरी के भी लक्षण देखने को मिलते हैं।
- कभी- कभी बच्चे के अंदर मिर्गी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
- बच्चे के मूत्र का रंग भी गहरा काला पड़ने लगता है।
यदि आपके बच्चे में उपरोक्त लक्षण दिखाई पड़ने लगे तो आपको उसकी जांच करवानी चाहिए।
anchorlink[3]anchorclose जाँच या परीक्षण - Test and diagnosis of lactose intolerance
सबसे पहले मूत्र की जांच करवाएं। अगर मूत्र में एमिनो एसिड या ब्लड प्लाज़्मा पाया जाता है, इसका मतलब आपका बच्चा इस रोग से पीड़ित है। हेपाटोमेगली के द्वारा भी इस रोग की जाँच की जाती है।ब्लड शुगर में असामान्य गिरावट से भी इस रोग को पहचान जाता है। पेट में तरल पदार्थ की उपस्थिति से भी इस रोग के इस रोग के होने की पुष्टि की जाती है।
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anchorlink[4]anchorclose दूध से एलर्जी के कारण - Cause of Lactose intolerance in Hindi
दूध से एलर्जी कई कारणों से हो सकती है:
दूध या दूध से बने कई खाद्य पदार्थ में लैक्टोज़ नामक एंजाइम होता है। इस प्रकार के प्रोटीन से शरीर में एक अलग तरह की प्रक्रिया उत्पन्न होती है। इस एंजाइम पर लैक्टोस नामक दूसरा एंजाइम प्रक्रिया करता है, जिससे ग्लूकोस और ग्लैक्टोस बनते हैं। जब यही एंजाइम बच्चे के शरीर में पर्याप्त मात्रा में नहीं होता है जो ग्लैक्टोस को ख़त्म कर सके। यही ग्लैक्टोस का स्तर शरीर में बढ़ता जाता है जिससे पूरे शरीर में विष फैल जाता है।
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anchorlink[5]anchorclose घरेलु उपचार - Home remedy for Lactose intolerance
- जैसे ही आप को लगता है कि बच्चे को दूध नुकसान कर रहा है , आप यह समझ लें कि उसे दूध से एलर्जी हो गयी है। अब आप सबसे पहला काम यह करें कि उसका दूध पीना बंद कर दें।
- उसे रोज़ नाश्ते से पहले एक चम्मच शहद पिला दें।
- उसको किसी भी प्रकार से अदरक पीसकर खिलाएं क्योंकि यह दूध में मौजूद प्रोटीन को पचाने में मदद करता है और हिस्टामिन के स्तर को घटाता है जो एलर्जी का मुख्य कारण है।
- गाजर के रस में ककड़ी, अनार व चुकंदर के रस को मिलाएं और रोज़ सुबह इस रस को पिलाएं। यह दूध और खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी को खत्म करता है।
- हल्दी, दूध से होने वाली एलर्जी से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा उपाय है।बच्चे के खाने में हल्दी की मात्रा बढ़ाएं।
- बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उसे अंडा, केला, और ताज़ी हरी सब्ज़ियों को खिलाएं।
- उसके खाने में विटामिन ई का प्रयोग करें।
- दूध से बने पदार्थों का सेवन न करवाएं।
- डिब्बा बंद चीजों में दूध की मात्रा ज्यादा होती है, अतः उसपर लगे हुए लेबल को अच्छी तरह से जाँच करके ही उसका इस्तेमाल करें।
- बच्चे को डिब्बे का दूध पिलायें जिसमे लैक्टोज़ न हो।
- बच्चे को सोया का दूध पिलायें।
घरेलू उपचार से आराम न मिलने पर योग्य चिकित्सक से मिलें क्योंकि बच्चे के साथ लापरवाही नहीँ बरतनी चाहिए।
anchorlink[6]anchorclose Video: दूध से एलर्जी के लक्षण - Symptoms of egg allergy
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