Category: टीकाकरण (vaccination)

शिशु को डेढ़ माह (six weeks) की उम्र में लगाये जाने वाले टीके

By: Salan Khalkho | 5 min read

शिशु को डेढ़ माह (six weeks) की उम्र में कौन कौन से टिके लगाए जाने चाहिए - इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी यहां प्राप्त करें। ये टिके आप के शिशु को कई प्रकार के खतरनाक बिमारिओं से बचाएंगे। सरकारी स्वस्थ शिशु केंद्रों पे ये टिके सरकार दुवारा मुफ्त में लगाये जाते हैं - ताकि हर नागरिक का बच्चा स्वस्थ रह सके।

D.P.T. Polio IPV हेपेटाइटिस बी vaccine हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी HIB रोटावायरस टीका न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन pneumococcal conjugate vaccine PCV

बधाई हो - आप का शिशु 6 सप्ताह (डेढ़ माह) हो गया है। 

यह बहुत ही ख़ुशी की बात है।

मगर!

इस ख़ुशी के मौके पे अपने शिशु को महत्वपूर्ण टिके लगवाना न भूलियेगा। ये टिके आप के शिशु को कई प्रकार के खतरनाक बिमारिओं से बचाएंगे। सरकारी स्वस्थ शिशु केंद्रों पे ये टिके सरकार दुवारा मुफ्त में लगाये जाते हैं - ताकि हर नागरिक का बच्चा स्वस्थ रह सके। यह व्यस्था भारत सरकार के दुवारा कई दशकों से प्रदान की जा रही है। 

शिशु को डेढ़ माह (six weeks) की उम्र में कौन कौन से टिके लगाए जाने चाहिए - इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी यहां प्राप्त करें। 

शिशु को 6 सप्ताह (डेढ़ माह ) की उम्र में ये टीके लगाये जाते हैं:

D.P.T. – पहली खुराक

D.P.T. का टीका वैक्सीन (D.P.T. Vaccine) शिशु को को तीन जानलेवा बीमारियोँ से बचने केलिए दिया जाता है - डिफ्थीरिया, कालीखांसी और टिटनस (Tetanus)। D.P.T. का टीका वैक्सीन (D.P.T. Vaccine) भारत सरकार द्वारा जारी अनिवार्य टीकों की सूचि में समलित है। हर साल करीब एक साल से कम उम्र के तीन लाख बच्चे विकासशील देशों में डिफ्थीरिया, कालीखांसी और टिटनस (Tetanus) के संक्रमण के कारण मृत्यु के शिकार होते हैं। ये मुख्यता वो बच्चे हैं जिन्हे  D.P.T. का टीका वैक्सीन (D.P.T. Vaccine) या तो नहीं लगाया गया या फिर समय पे नहीं लगाया गया। D.P.T. का टीका वैक्सीन (D.P.T. Vaccine) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें। 

पोलियो का टिका- पहली खुराक (IPV1) 

पोलियो से संक्रमित लोगों में पोलियो - फालिज (paralysis) का रूप लेता है जिस में की व्यक्ति अपना हाथ और पैर उठाने में असमर्थ हो जाता है यहाँ तक की हमेशा के लिए अपंग भी हो जाते हैं। कुछ लोगों में पोलियो का संक्रमण इतना घम्भीर भी हो सकता है की वे साँस तक लेने में असमर्थ हो जाते हैं और इस वजह से उनकी मृत्यु भी हो जाती है। भारत वर्ष में एक समय था जब पोलियो होना एक आम बात था - मगर भारत सरकार के तीस सालों (30 years) के अथक परिश्रम के दुवारा आज भारत में पोलियो होना एक दुर्लभ बात है। भारत सरकार के पोलियो अभियान के दुवारा देश के सभी बच्चों को इसका टीका मुफ्त में लगाया जाता है - घर -घर जाकर लगाया जाता है। आप को यह सुनिश्चित करना है की आप का शिशु समय पे पोलियो के टीके (IPV) का खुराख ले रहा है - ताकि वो पोलियो के गंभीर बीमारी से बचा रह सके। पोलियो वैक्सीन - IPV1, IPV2, IPV3 वैक्सीन (Polio vaccine IPV) पोलियो का टीका शिशु को पोलियो के संक्रमण के खतरे से बचाता है। Polio vaccine IPV के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें। 

हेपेटाइटिस बी का टीका- दूसरी खुराक

शिशु के छेह महीने होते ही उसे हेपेटाइटिस बी का दूसरा टीका लगाने का समय हो गया है। हेपेटाटाइटिस में अलग अलग तरह के संक्रामक रोग होते हैं जिन्हें ए बी सी डी और ई में बांटा गया है। 90 फीसदी मौतें हेपेटाइटिस बी और सी के कारण होती हैं। एशिया में होने वाली मौतों की संख्या काफी ज्यादा है। इसमें चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है। एड्स की तर्ज पे हेपेटाइटिस बी भी एक खतरनाक बीमारी है। हेपेटाटाइटिस वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद बुखार होता है और मरीज की भूख में कमी आती है। धीरे धीरे यह लीवर को पूरी तरह खराब कर देता है। अब तक इसका कोई इलाज मौजूद नहीं है। ऐसे में शोधकर्ताओं की मांग है कि सावधानी पर ज्यादा ध्यान दिया जाए। हेपेटाइटिस बी का टीका के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें। 

हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) –  पहली खुराक

हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) वैक्सीन - शिशु को बहुत ही खतरनाक विषाणु (bacteria) के संक्रमण से बचाता है। इस खतरनाक  विषाणु (bacteria) का नाम है - Haemophilus influenzae type b - और इस के संक्रमण से दमागी बुखार, मस्तिष्क को छती, फेफड़ों का इन्फेक्शन (lung infection) , मेरुदण्ड का रोग और गले का गंभीर संक्रमण भी शामिल है। हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) बेहद ही खतरनाक संक्रमण है जो पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी से संक्रमित हर बीस (20) में से एक बच्चे की मृत्यु निश्चित है -  इसी बात से इस बीमारी के खतरों के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है। हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी का टिका (HIB vaccine) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें। 

रोटावायरस- पहली खुराक (मुँह में लिया जाने वाला डायरिया वैक्सीन)

शिशु को गंभीर दस्त लगने का सबसे आम कारण है रोटावायरस का संक्रमण। छह महीने के बच्चे से लेकर दो साल तक के बच्चे को रोटावायरस के संक्रमण का खतरा बना रहता है। रोटावायरस वैक्सीन (RV) (Rotavirus Vaccine) के आभाव में शिशु को रोटावायरस के संक्रमण से बचा पाना लगभग असंभव है। इससे पहले की शिशु पांच साल (5 years) का हो, हर शिशु को कम से कम एक बार तो रोटावायरस के संक्रमण के कारण दस्त होता ही है। रोटावायरस वैक्सीन (RV) (Rotavirus Vaccine) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें। 

न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन - पहली खुराक

न्यूमोकोकल (pneumococcal) का संक्रमण एक contagious बीमारी - जिसका मतलब होता है की इस बीमारी को फ़ैलाने के लिए किसी मछर या मक्खी की जरुरत नहीं पड़ती है - बल्कि इसका संक्रमण एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति को हवा के द्वारा ही फ़ैल जाता है। न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन [pneumococcal conjugate vaccine] (PCV13) शिशु को तेरह प्रकार (13 types) के बीमारियोँ से बचाता है जबकि न्यूमोकॉकल पॉलीसैकराइड वैक्सीन [pneumococcal polysaccharide vaccine] (PPSV23) शिशु को 23 प्रकार (23 types) के बीमारियोँ से बचाता है जो न्यूमोकोकल जीवाणु (pneumococcal bacteria) के संक्रमण से होता है। न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें। 

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