Category: शिशु रोग

अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) - कारण और बचाव

Published:08 Sep, 2017     By: Salan Khalkho     5 min read

कुछ बातों का ख्याल अगर रखा जाये तो शिशु को SIDS की वजह से होने वाली मौत से बचाया जा सकता है। अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की वजह शिशु के दिमाग के उस हिस्से के कारण हो सकता है जो बच्चे के श्वसन तंत्र (साँस), दिल की धड़कन और उनके चलने-फिरने को नियंत्रित करता है।


अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) - कारण और बचाव

अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) जिसे अंग्रेज़ी में sudden infant death syndrome कहा जाता है। यह एक परिस्थिति है जिस मैं शिशु की अचानक - बिना किसी कारण के - मृत्यु हो जाती है।  

बच्चे में "अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS)" की सबसे ज्यादा सम्भावना जन्म के पहले तीन महीने में रहती है। 

89 percent sids incidents with babies less than 6 month

यह तो नहीं पता की "अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS)"  किस वजह से होता है - मगर कुछ बातों का ख्याल अगर रखा जाये तो शिशु को SIDS की वजह से होने वाली मौत से बचाया जा सकता है। 

क्या है अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) 

यह शिशु मृत्यु की वह वजह है जिसमें सोते हुए स्वस्थ शिशु की अचानक से बिना किसी स्पष्ट कारण के मृत्यु हो जाती है। 

sharing room with baby halves the risk of SIDS

अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS)  को अंग्रेज़ी में cot death के नाम से भी जाना जाता है। हालाँकि यह नाम थोड़ा भ्रम में डालने वाला है। क्यूंकि इस नाम "cot death" को सुनने से यह लगता है की "अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS)" केवल उसी वक्त होता है जब बच्चा बिस्तर (cot) पे सो रहा होता है। मगर सच यह है की "अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS)" के कारण शिशु की सोते वक्त मौत कहीं भी हो सकती है। - जरुरी नहीं की शिशु की मौत केवल बिस्तर पर ही सोने से हो। 

कितना आम है अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) 

अच्छी बात यह ही की अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की वजह से शिशु की मौत होना बहुत ही दुर्लभ घटना है। भारत में इसकी वजह से शिशु में मृत्यु दर दूसरे देशों के मुकाबले बहुत ही कम है। मगर दुःख की बात यह है की कई देशों में तो हर साल दो से छह महीने के शिशुओं में होने वाले की मौत का मुख्या कारण अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) ही है। 

कम वजन जन्मे शिशुओं में SIDS द्वारा मृत्यु की सम्भावना ३ गुना ज्यादा होती है

क्यों होता है अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) 

यह किसी को नहीं पता की अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की वजह क्या है। शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) कई कारणों से हो सकता है - विशेषकर जब बच्चे अपने विकास के बहुत ही नाजुक अवस्था मैं होते हैं। 

कुछ बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की वजह शिशु के दिमाग के उस हिस्से के कारण हो सकता है जो बच्चे के श्वसन तंत्र (साँस), दिल की धड़कन और उनके चलने-फिरने को नियंत्रित करता है। जब शिशु बहुत ज्यादा तनाव में होता है - जैसे की जब बहुत ज्यादा गर्मी हो, या फिर उसका नाक या मुँह सोते वक्त चद्दर (bed sheet) से ढक जाये या उसे ऐसे हालात का सम्मान करना पड़े जिसमें वो अपने ह्रदय की गति को नियंत्रित करने में असमर्थ हो जाये तो भी उसकी मृत्यु अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) के कारण हो सकती है। 

SIDS is more common in baby boys

अबतक किसी भी व्यग्यनिक शोध में यह बात सामने नहीं आयी है की अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) किसी संक्रमण के कारण होता है। हाँ - यह हो सकता है की नवजात शिशु में रोग प्रतिरोधक छमता बहुत कम होती है जिस कारण संभव है की थोड़े से ही संक्रमण के कारण उनकी मौत हो जाती हो। 

कब शिशु की मृत्यु अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) के कारण होती है 

अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की घटना सर्वाधिक उस वक्त देखी गयी है जब यह समझा जाता है की शिशु सो रहा है। अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की अधिकांश घटनाएं रात के समय ही पायी गयी हैं। मगर अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) के कारण शिशु की मृत्यु कभी भी हो सकती है - चाहे दिन हो या रात। 

अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की घटना अधिकतर ठंडक के दिनों में देखी जाती है। हो सकता है की इसका कारण यह है की ठण्ड के दिनों में लोग ज्यादा कपडे पेहेनते हैं - और रात को सोते वक्त हीटर या ब्लोअर (blower) भी चालू रखते हैं जब बहार का तापमान बहुत कम होता है। इसकी वजह से कमरे का तापमान रात में बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। अगर बच्चा पहले से ही बहुत ज्यादा गरम कपडे पहने हुए है तो उसका शरीर इस बढ़े हुए तापमान को सहन नहीं क्र पायेगा। ठण्ड के महीने में हीटर या ब्लोअर के कारण कमरे की बढ़ी हुई अत्यधिक गर्मी शिशु के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। 

उम्र की किस अवस्था में शिशु को सबसे ज्यादा खरता रहता है अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) से 

  1. अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की अधिकांश घटनाएं उस वक्त देखी गयी हैं जब शिशु छह महीने से छोटा हो। 
  2. - इसमें भी सबसे ज्यादा सम्भावना उस वक्त रहती है जब शिशु दो महीने से लेकर तीन महीने का हो। जैसे जैसे शिशु उम्र में बड़ा होता जाता है, अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) के द्वारा उसकी मौत की सम्भावना भी कम होती जाती है। एक साल के बाद शिशु की मृत्यु अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) कारण होना एक दुर्लभ बात है।  
  3. - जो महिलाएं 20 साल से कम उम्र में माँ बनती हैं, उनके बच्चों में अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की वजह से मृत्यु होने की सम्भावना ज्यादा होती है। हो सकता है की इसका तालुक उम्र से नहीं वरन माँ के रहन-सहन से ज्यादा सम्बंधित हो। कम उम्र की माँ के लिए सुरक्षित सोने से सम्बंधित जानकारी उनके नवजात शिशु की जान बचा सकता है। 
  4. अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की अधिकांश घटनाएं बेटों में ज्यादा देखने को मिलती है। बेटियोँ में यह घटनाएं कम ही देखने को मिलती है। हो सकता है की इसकी वजह लड़कों और लड़कियों के शरीर में हार्मोन के अंतर के कारण हो। या फिर इसका कारण यह भी हो सकता है की लड़कों का दिमाग, लड़कियों की तुलना में भिन तरह से प्रतिक्रिया करता है। 
  5. अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की सम्भावना और भी अधिक बाद जाता है अगर आप का बच्चा समय से पहले जन्मा हो। या फिर आप के बच्चे के वजन जन्म के समय 2.5kg से कम हो। 

शिशु को किस तरह बचाएं अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) से 

शिशु को अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) से बचने का कोई तरीका नहीं है। हाँ - अलबत्ते कुछ बातों का ख्याल रख आप इसकी संभावना को बहुत कम कर सकती है। आप के आलावा और भी लोग जो आप के बच्चे के सोने का ख्याल रखते हैं, उन्हें भी आप इस बात की जानकारी दे दें। 

शिशु को अपनी निगरानी में पीट के बल लेटाएं

स्वस्थ शिशु को अगर आप पीट के बल लेटायेंगे तो उसे घुटन नहीं होगा। बच्चे को करवट लेकर एक तरफ सुलाना सुरक्षित नहीं है। अपने बच्चे को उसी कमरे में सुलाएं जिस कमरे में आप सोती हैं। लेकिन शिशु को अपने बिस्तर पे अपने साथ ना सुलाएं। उसके लिए अपने बिस्तर के पास दूसरा बिस्तर बिछाएं - ताकी रात-बिरात आप उसका ख्याल रख सकें। 

जो बच्चे दूसरे कमरे में अपने माँ से दूर सोते हैं, या अपने माँ के साथ एक ही बिस्तर पे सोते हैं, उनमे अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की सम्भावना सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन भारत में शिशु की मृत्यु की घटना अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) की वजह से बहुत ही कम है - इस तथ्य के बावजूद की भारत में अधिकांश घरों में शिशु और माँ एक ही बिस्तर पे सोते हैं। शिशु और माँ के एक ही बिस्तर में सोने से रत भर माँ शिशु का ख्याल रख सकती है और रात में कई बार आसानी से स्तनपान करा सकती है। 


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