Category: बच्चों की परवरिश

5 वजह बच्चों के झूट बोलने के

By: ZN | 1 min read

सच बोलने के लिए बच्चे को मारे-पीटे नहीं, बल्कि प्यार से कुछ इस तरह समझाएं कि वह सच बोलने के लिए प्रेरित हो। साथ ही अपनी गलती मानने में भी हिचकिचाए नहीं।

कुछ बच्चे ऐसे होते जो अपनी हर छोटी-छोटी बात मनवाने के लिए अपने पेरेंट्स से झूठ बोलते हैं। लेकिन, उनकी यह आदतें तब और बढ़ जाती हैं जब उंनकी इन झूठ आदतों पर पेरेंट्स सख्ती से कारवाई नही करते हैं। इसके अलावा, भी कई ऐसे कारण है, जिसके चलते बच्चे अपने पेरेंट्स से झूठ बोलते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं

जरूरत से ज्यादा डरा कर रखना

कुछ पेरेंट्स ऐसे भी होते हैं जो बात-बात पर बच्चों को पीटते या डराते हैं। ऐसे में, बच्चे डरवश अच्छे कामों में भी अपने पेरेंट्स से झूठ बोलने लगते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप पाने बच्चों को डराने-धमकाने की बजाए उन्हें प्यार से समझाएं।



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बात-बात पर टोकना

जब बच्चे बड़े होने लगते हैं, तब पेरेंट्स को ज्यादा रोक-टोक नहीं करनी चाहिए। खासकर जब वह अपने दोस्तों के साथ खेलने या बाहर किसी काम से जा रहे हों। अक्सर आपने देखा होगा कि पेरेंट्स अपने बच्चों के घर से निकलते ही बार-बार फोन करके यह पूछते हैं कि कब तक आओगे, कितनी देर लगा दी जैसे अनेकों बातें सुनाने लगते हैं इन सब से बचने के लिये बच्चे अपने पेरेंट्स से झूठ का सहारा लेते हैं।

फैमली की लड़ाई

अब बात आती है कि बच्चे यह झूठ बोलने की भाषा कहाँ से सीखते हैं, तो आपको बता दें कि बच्चे यह चीजें अपने घर के बड़ों से ही सीखते हैं। क्योंकि, जब भी आप किसी बात को लेकर झगड़ा करते हैं तब आप एक-दूसरे से झूठ बोलते हैं। ऐसे में, बच्चे को भी इस से बढ़ावा मिलता है।

बच्चों को भी दें प्राईवेसी

आजकल के ​अपेरेंट्स को यह बात समझनी बहुत जरूरी है कि आजकल के बच्चे एक प्राईवेसी चाहते हैं। अगर वो गलत नहीं है तब भी उन्हें अपनी बात किसी के साथ शेयर करना या सफाई देना अच्छा नहीं लगता है। लेकिन कई पेरेंट्स इस बात को समझने के बजाय अपने बच्चों की छोटी-छोटी बातों पर शक करते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें ताने मारते हैं। आजकल के बच्चों का झूठ बोलने के पीछे ये सबसे बड़ा कारण है।

भरोसे की कमी

पेरेंट्स अपने बच्चों पर जरूरत से ज्यादा शक करते हैं, जिससे कि बच्चे भी उन से सच कहने की बजाए झूठ बोलना ज्यादा अच्छा समझते हैं। क्योंकि, कई पेरेंट्स ऐसे होते हैं जो बच्चों की बात के बजाय बाहर वालों की बातों पर विश्वास करते हैं। जबकि पेरेंट्स को सिर्फ अपने बच्चे पर विश्वास करना चाहिए।

पेरेंट्स क्या करें ?

अगर आप सच में चाहते हैं कि आपका बच्चा झूठ न बोले तब इसके लिए आप उन्हें प्यार से समझाएं। क्योंकि, जब वह बातों को समझने लगेगा तो उसे सही-ग़लत और अच्छे-बुरे का फर्क बताएं। शरारतों में उसका साथ जरूर दें, मगर उसकी शैतानियों पर हिदायत देना न भूलें। सच बोलने के लिए बच्चे को मारे-पीटे नहीं, बल्कि प्यार से कुछ इस तरह समझाएं कि वह सच बोलने के लिए प्रेरित हो। साथ ही अपनी गलती मानने में भी हिचकिचाए नहीं।

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