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प्रेगनेंसी में अपच (indigestion) - कारण और निवारण

By: Admin | 7 min read

गर्भावस्था के दौरान अपच का होना आम बात है। लेकिन प्रेगनेंसी में (बिना सोचे समझे) अपच की की दावा लेना हानिकारक हो सकता है। इस लेख में आप पढ़ेंगी की गर्भावस्था के दौरान अपच क्योँ होता है और आप घरेलु तरीके से अपच की समस्या को कैसे हल कर सकती हैं। आप ये भी पढ़ेंगी की अपच की दावा (antacids) खाते वक्त आप को क्या सावधानियां बरतने की आवश्यकता है।

प्रेगनेंसी में अपच (indigestion) - कारण और निवारण

गर्भावस्था के दौरान अपच का होना आम बातें है। उल्टी मिचली, शरीर में सूजन, कमजोरी, इन सब के साथ-साथ शरीर के पाचन तंत्र पर भी गर्भावस्था का प्रभाव पड़ता है। 

गर्भावस्था के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं।  यह बदलाव बहुत ही तकलीफ दे होते हैं।  इनमें से सबसे ज्यादा परेशान करने वाला साइड इफेक्ट है अपच। 

हम इस लेख में आपको बताएंगे कि किस तरह से आप गर्भावस्था के दौरान अपच की समस्या से निजात पा सकती हैं।  लेकिन उससे पहले हम लोग यह चर्चा करेंगे की गर्भावस्था के दौरान अपच क्यों होता है और किन लक्षणों से आप यह जान सकती हैं कि अपच गर्भावस्था की वजह से हो रहा है। 

गर्भवती महिला में अपच मुख्यता गर्भावस्था के अंतिम दौर में होता है।  अपच के दौरान छाती में जलन महसूस होता है।  

यह जलन पेट से छाती और छाती से गले की तरफ बढ़ता हुआ महसूस होता है। होने वाली मां के लिए यह एक बहुत ही डरावना अनुभव है क्योंकि इस बात की चिंता बनी रहती है कि क्या गर्भ में पल रहा बच्चा स्वस्थ है?  कहीं अपच और छाती में जलन की वजह से शिशु को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचेगा?  इन सारी चिंताओं का भी हाल हम इस लेख में जानेंगे।

इस लेख में:

  1. गर्भावस्था के दौरान अपच के लक्षण
  2. अपच - घबराहट और चिंता का विषय
  3. अपच से शिशु को गर्भ में नुक्सान या फायेदा
  4. क्योँ प्रेगनेंसी में अपच होता है?
  5. प्रेगनेंसी में अपच से बचाव कैसे करें
  6. गर्भावस्था के दौरान अपच का इलाज
  7. डोक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए

गर्भावस्था के दौरान अपच में कैसा महसूस होता है? - लक्षण 

  • छाती और पेट में बेचैनी और दर्द का अनुभव
  • जलन का अनुभव
  • पेट वाले हिस्से में भारीपन लगना या दबाव महसूस होना
  • बार बार डकार आना
  • पेट फूलना
  • उल्टी का अनुभव
  • ऐसा  अनुभव होना कि जैसे जो खाना खाए हैं वह बाहर आ जाएगा

गर्भावस्था के दौरान अपच (Indigestion or dyspepsia) का अनुभव ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को तब होता है जब वह अपने गर्भ काल के 27 वें सप्ताह को पार कर चुकी होती है। 

गर्भावस्था के दौरान अपच में कैसा महसूस होता है - लक्षण

गर्भावस्था के दौरान 80% महिलाओं को इस अनुभव से गुजरना पड़ता है।  प्रेगनेंसी में स्त्री का शरीर कुछ ऐसे हार्मोन का निर्माण करता है जो शिशु के विकास के लिए महत्वपूर्ण है और स्त्री के शरीर को शिशु के बढ़ते आकार के लिए तैयार करते हैं। 

 इन हार्मोन की वजह से स्त्री का शरीर लचीला बनता है ताकि जैसे-जैसे शिशु आकर में, बढ़े स्त्री का शरीर उस के अनुपात में फैल सके।  लेकिन इसका साइड इफेक्ट (side effect) यह होता है कि शरीर की मांसपेशियां जो आहार को पेट से बाहर आने से रोकती है।  

वह भी लचीली बन जाती है, और इस वजह से  आहार को बाहर आने से रोकने में इतनी सक्षम नहीं होती है। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता है गर्भवती महिला के लिए अपच और उल्टी की समस्या आम बात बन जाती है।

अपच - घबराहट और चिंता का विषय 

अपच और उल्टी की वजह से कुछ गर्भवती महिलाओं को इस बात की चिंता होती है कि इसका क्या बुरा प्रभाव पेट में पल रहे बच्चे पर पड़ेगा।  

अपच - घबराहट और चिंता का विषय

सच बात तो यह है कि अपच और उल्टी की वजह से शारीरिक तकलीफ होती है लेकिन इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।   

करीब 10 में से 8 महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कभी ना कभी अपच की समस्या का सामना करना पड़ता है। 

कभी-कभी पेट में हो रही तकलीफ की वजह से यह पता करना मुश्किल हो जाता है कि यह तकलीफ अपच की वजह से हो रही है - या - किसी और वजह से। 

क्या शिशु सुरक्षित तो है? गर्भावस्था के दौरान पेट में इस प्रकार की तकलीफ की मुख्य वजह पक्षी होती है इसीलिए बेवजह आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।   आपका शिशु सुरक्षित है। 

अपच से शिशु को गर्भ में नुक्सान या फायेदा 

आज की वजह से हार पेट में थोड़ी देर से पकता है।  लेकिन यह अच्छी बात की है।  आहार के धीरे धीरे पचने से शिशु को  प्लेसेंटा के जरिए पोषण मिलने  के लिए ज्यादा समय या अवसर मिल जाता है। 

अपच से शिशु को गर्भ में नुक्सान या फायेदा

अपच की स्थिति एक प्रकार से शिशु के हित में ही है।  अपच से आप यह भी निष्कर्ष निकाल सकती हैं कि आपकी शिशु का विकास ठीक तरह से हो रहा है।  

जब समय के साथ शिशु का आकार सही अनुपात में बढ़ता है तभी आपको अपच की समस्या का सामना भी करना पड़ता है।  

इसका मतलब अपच इस बात को दर्शाता है कि शिशु गर्भ में अपने आकार में समय के साथ सही अनुपात में बढ़ रहा है जो की अच्छी बात है। 

क्योँ प्रेगनेंसी में अपच होता है?

अपच को डॉक्टरी भाषा में दिस्पेसिया (dyspepsia) कहते हैं। गर्भावस्था के दौरान अपच की समस्या मुख्यता स्त्री के शरीर में हारमोनल बदलाव के कारण होता है। 

क्योँ प्रेगनेंसी में अपच होता है

  • जैसा की मैंने अभी ऊपर बताया कि इन हार्मोन के असर से शरीर की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती है जो आहार को पेट से वापस बाहर आने से रोकने में इतनी सक्षम नहीं होती हैं।  
  • इन हार्मोन की वजह से पाचन तंत्र भी ढीला पड़ जाता है।  इसका नतीजा होता है अपच, पेट में गैस का बनना, छाती में जलन, उल्टी, और उल्टी का अनुभव। प्रेगनेंसी में अपर किन कारणों से होता है:
  •  गर्भ में शिशु के आकार में बढ़ने पर गर्भवती महिला  के पेट पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से पेट में मौजूद आहार ऊपर की तरफ  बढ़ता है।  गर्भकाल के 27 सप्ताह में शिशु का आकार इतना बढ़ जाता है कि गर्भवती स्त्री के पेट पर बहुत दबाव पड़ता है।
  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में हो रहे हारमोनल बदलाव की वजह से
  • पेट के ऊपर मौजूद मांसपेशी जिसे sphincter  कहते हैं,  यह आहार को पेट से बाहर आने से रोकता है।  लेकिन हारमोनल बदलाव की वजह से sphincter  ढीला पड़ जाता है।  और पूरी दक्षता के साथ आहार को पेट से बाहर आने से रोकने में असक्षम हो जाता है। 
  • गर्भावस्था से पहले अगर अपच की समस्या आपके लिए आम बात थी तो गर्भावस्था के दौरान आपको इसकी समस्या का और ज्यादा सामना करना पड़ सकता है। 

प्रेगनेंसी में अपच से बचाव कैसे करें 

प्रेगनेंसी में आपका  अपच को पूरी तरह से रोक तो नहीं सकती हैं लेकिन इसके प्रभाव को कम कर सकती हैं।  हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे सुझाव जिन्हें अगर आप ध्यान में रखेंगे तो आपको अपच की समस्या का उतना ज्यादा सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्रेगनेंसी में अपच से बचाव कैसे करें

भोजन के बाद अपने आप को सीधे स्थिति में रखें

आहार ग्रहण करने के बाद कम से कम 1 घंटे तक सोए नहीं।  अपने आप को सीधी स्थिति में रखें और ऐसी स्थिति में रहे जिससे आपके पेट पर दबाव ना पड़े।  

उदाहरण के लिए कुछ उठाने के लिए नीचे ना झुके।  अगर झुकने की आवश्यकता पड़े तो अपने घुटनों के  बल  झुके। 

थोड़ा-थोड़ा आहार ग्रहण करें

दिन में तीन बार बड़ा-बड़ा आहार ग्रहण करने की  बजाएं दिन भर थोड़ा थोड़ा कुछ खाते रहे।  इससे दिन भर आपको भूख भी नहीं लगेगा और आपका पेट बहुत ज्यादा  भरा भी नहीं रहेगा।  

बस इस बात का ध्यान रखें कि आप जो भी खाए वह पौष्टिक हो और इतना खाएं ताकि आपकी शारीरिक आवश्यकता तथा शिशु के विकास के लिए भी जरूरी पोषण मिल सके। 

एक बात और गर्भावस्था के दौरान आपको दो लोगों के बराबर आहार करने की आवश्यकता नहीं है।  गर्भ में बढ़ते हुए शिशु के लिए थोड़ा सा आहार ही बहुत है।  

आप जितना आहार ग्रहण करती हैं उतना ही आहार ग्रहण करना जारी रखें।  गर्भावस्था के दौरान डाइटिंग बिल्कुल ना करें।  आपका आहार ऐसा हो जिसे शिशु के विकास के लिए सभी जरूरी पोषण मिल सके। 

उन आहारों से दूर रहें जिन से होता है अपार

अपने अनुभव किया होगा कि आहारों से आपको अपच (dyspepsia) की समस्या ज्यादा होती है। गर्भावस्था के दौरान ऐसे आहारों से दूर रहने में ही समझदारी है। 

गर्भावस्था के दौरान जब भी आपको अपच की समस्या हो इस बात पर ध्यान दें कि आपने कौन से आहार ग्रहण की है और किन आहारों से अपच होने की संभावना है।  

आप ऐसे सभी आहारों की एक लिस्ट तैयार कर सकती हैं।  ताकि ऐसे आहारों से आप सावधान रह सकें।  कुछ आहार गर्भावस्था के दौरान अपच के लिए प्रसिद्ध हैं जैसे कि तले हुए आहार,  चॉकलेट,  साइट्रस फ्रूट जैसे संतरा इत्यादि। 

भोजन के दौरान पानी कम पिए

जब आप भोजन ग्रहण कर रही हो तो बहुत ज्यादा पानी ना पिएं।  भोजन के द्वारा पानी पीने से छाती में जलन का अनुभव बढ़ सकता है।  भोजन करने से 1 घंटे पहले पानी पी लें।  भोजन के दौरान अगर पानी पीना ही पड़े तो थोड़ा सा पिए। 

गर्भावस्था के दौरान कॉफी और मदिरा का सेवन ना करें

कॉफी और अल्कोहल दोनों ही अपच और खट्टी डकार के लिए जाने जाते हैं।  लेकिन सावधान,  क्योंकि इनकी वजह से मिसकैरेज (miscarriage) की भी संभावना होने का डर रहता है। 

सिर्फ इतना ही नहीं,  कुछ शिशु रोग विशेषज्ञ बर्थ डिफेक्ट (birth defects) की वजह गर्भावस्था के दौरान  कॉफी और अल्कोहल के सेवन को भी मानते हैं। 

ध्रुमपान छोड़ दे

अगर आप ध्रुमपान करती हैं,  तो गर्भधारण करने से कई महीने पहले से ही  ध्रुमपान पूर्ण रुप से छोड़ दें। अपच और खट्टी डकार आना आम बात है।  

लेकिन गर्भ में पल रहे शिशु पर इसका बहुत ज्यादा बुरा प्रभाव भी पड़ता है।  शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए,  ऑक्सीजन बहुत जरूरी है।  

अगर ऑक्सीजन की कमी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है जो कि शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।  

ध्रुमपान में मौजूद निकोटीन से शिशु में बर्थ डिफेक्ट (birth defects) की संभावना भी बढ़ जाती है।  ध्रुमपान करने वाली महिलाओं   के शिशु में Sudden Infant Death Syndrome (SIDS) एक आम बात है।

रात्रि में अपच

अगर आपको अपच (dyspepsia) की समस्या का सामना रात्रि आहार के बाद ज्यादा करना पड़ता है तो कोशिश यह करें कि आप रात का भोजन सोने से 3 घंटा पहले ही ग्रहण कर ले। 

 3 घंटे का समय पर्याप्त है आपके पाचन तंत्र के लिए।  इतने समय के अंदर में आपका पाचन तंत्र भोजन को पचा कर small intestine  की तरफ बढ़ा देगा। 

करवट लेकर सोने

कुछ गर्भवती महिलाएं जिन्हें अपच (dyspepsia) इस समस्या का सामना करना पड़ता है,  अगर करवट लेकर सोने तो उन्हें अपच और खट्टी डकार की समस्या से आराम मिलता है।  

इसीलिए अगर आप अपच और खट्टी डकार से परेशान हैं तो सोते वक्त करवट लेकर सोए।  इससे आपको आराम मिल सकता है।  

सोते वक्त कोशिश करें कि आपकी सर की स्थिति आपके पैर की स्थिति से थोड़ी ऊंची रहे जरूरत पड़े तो अपने बिस्तर को सर की तरफ से थोड़ा ऊंचा करते हैं।  इससे गुरुत्वाकर्षण के कारण आपके पेट  मैं पड़ा आहार ऊपर की तरफ नहीं  चढ़ेगा। 

ढीले ढाले कपड़े पहने

गर्भावस्था के दौरान ढीले-ढाले और आरामदायक कपड़े पहने।  आप पेट के पास आवश्यक रूप से ढीले होने चाहिए ताकि  आपके पेट पर इनका दबाव ना पड़े। 

गर्भावस्था के दौरान अपच का इलाज 

अपच की समस्या के समाधान के लिए दवा की दुकानों पर कई प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं।  लेकिन गर्भावस्था के दौरान आपको इन दवाओं को ग्रहण करते वक्त बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है।  

गर्भावस्था के दौरान अपच का इलाज

अपच के लिए जो दवा आप ग्रहण करने जा रही हैं,  जरूरी नहीं कि वह आपके  पेट में पल रहे शिशु के लिए सुरक्षित हो।  इसलिए किसी भी दवा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की राय अवश्य ले ले।  

गर्भावस्था के दौरान आपको दवा की मात्रा का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है।  कुछ दवाएं गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित होती हैं,  लेकिन एक निर्धारित मात्रा से ज्यादा होने पर वह हानि भी पहुंचा सकती हैं। 

दवाओं को लेने से पहले उनकी मात्रा सुनिश्चित अवश्य कर लें,  ताकि कहीं अनजाने में आप गलती से निर्धारित मात्रा से ज्यादा सेवन ना  कर लें। 

अपच के इलाज के लिए antacids  एक बहुत ही कारगर दवा है।  लेकिन सावधान, antacids  गर्भावस्था के दौरान ली जा रही दवाइयों के अवशोषण में अवरुद्ध पैदा कर सकता है।  इसका आपके शरीर पर और आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 

डोक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए 

गर्भावस्था के दौरान अपच और छाती में जलन चिंता का विषय हो सकता है विशेषकर अगर आप ने ऐसा अनुभव गर्भावस्था के पहले नहीं किया है तो।  लेकिन अधिकांश मामलों में अपच की समस्या मामूली और कुछ समय के लिए ही रहती है। 

डोक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए

लेकिन कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान अपच और खट्टी डकार की समस्या गंभीर रूप भी ले सकती है।  कुछ हालातों में आपको डॉक्टर की राय लेनी भी पढ़ सकती है।  अगर आपको नीचे दिए लक्षण दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें:

  1. अगर आप की उल्टी रुक नहीं रही है
  2. गर्भावस्था के दौरान आपका वजन बढ़ने की बजाये घट रहा है तो
  3. अगर आपके पेट के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव हो रहा है
  4. अगर आपके उल्टी में खून आ रहा है या  थूक में खून आ रहा है
  5. Antacid दवा के प्रभाव के खत्म होने के बाद फिर से अपच और खट्टी डकार की समस्या का लौटाना
  6. रात भर खट्टी डकार की समस्या से परेशान रहना
  7. काले रंग का मल त्याग

अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको दिखे तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।  डॉक्टर से बात करते वक्त बिना संकोच सभी लक्षण अपने डॉक्टर को बताएं ताकि आपका डॉक्टर समय पर उनका सही इलाज कर सके। 

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