Category: शिशु रोग

जलशीर्ष - लक्षण इलाज और बचाव

By: Admin | 3 min read

जलशीर्ष यानी Hydrocephalus एक गंभीर बीमारी है जो शिशु के विकास को प्रभावित कर सकती है और उसके मस्तिष्क को हमेशा के लिए नुक्सान पहुंचा सकती है। गर्भावस्था के दौरान कुछ सावधानियां बारत कर आप अपने शिशु को जलशीर्ष (Hydrocephalus) से बचा सकती हैं।

जलशीर्ष - लक्षण इलाज और बचाव

जलशीर्ष यानी Hydrocephalus, एक प्रकार की स्थिति है जिसमें मस्तिष्क में मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid) अत्यधिक मात्रा में जमा होने लगता है। 

हमारे मस्तिष्क के लिए मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid)  बहुत आवश्यक है,  क्योंकि यह हमारे मस्तिष्क को चोट लगने से बचाता है।  

लेकिन अत्यधिक मात्रा में इसकी मौजूदगी हमारे मस्तिष्क पर दबाव बना सकती है।  इस दबाव की वजह से मस्तिष्क को चोट लग सकता है। 

हालांकि यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्तियों में हो सकती है लेकिन कम उम्र के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है।  

इस लेख में:

  1. क्योँ होता है जलशीर्ष यानी Hydrocephalus
  2. जलशीर्ष (Hydrocephalus) के लक्षण
  3. जलशीर्ष (Hydrocephalus) का चिकित्सीय इलाज
  4. जलशीर् से बचाव
  5. क्योँ होता है जलशीर्ष - हिंदी में जलशीर्ष के कारणों

क्योँ होता है जलशीर्ष यानी Hydrocephalus

मस्तिष्क में मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid)  के इकट्ठा होने से सिर में सूजन भी हो सकती है।  क्योंकि छोटे बच्चों की खोपड़ी की हड्डियों अभी तक ठीक से जुड़ी नहीं होती हैं और उनके सामने का करोटी अन्तराल खुला रहता है इसलिए अगर समय पर ऑपरेशन ना किया जाए तो शिशु के मस्तिष्क पर घातक चोट पहुंच सकती है। 

जन्म के समय शिशु का सर अगर सामान्य से बहुत ज्यादा बढ़ा है तो यह जलशीर्ष यानी Hydrocephalus की निशानी हो सकता है। 

ऐसी स्थिति में शिशु को तुरंत ऑपरेशन के लिए भेजना चाहिए। शिशु को जलशीर्ष यानी Hydrocephalus जन्म के बाद भी हो सकता है।  यह कई कारणों से हो सकता है जैसे कि संक्रमण ट्यूमर यह मस्तिष्क में अत्यधिक मात्रा में रक्त स्राव। 

क्योँ होता है जलशीर्ष यानी Hydrocephalus

जलशीर्ष (Hydrocephalus) के लक्षण 

  1. सर दर्द
  2. उल्टी और मैथिली
  3.  धुंधला दिखाई देना  (धुँधली दृष्टि)
  4. शरीर को नियंत्रण करने में परेशानी (Balance problems)
  5. मूत्राशय पर नियंत्रण की समस्याएं
  6.  सोचने समझने में और याददाश्त की समस्या

कई बार जलशीर्ष (Hydrocephalus)  कि कोई भी लक्षण नहीं दिखाई देते हैं लेकिन फिर भी इससे शिशु पीड़ित हो सकता है।

जलशीर्ष (Hydrocephalus) का चिकित्सीय इलाज

अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो यह शिशु के मस्तिष्क को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बाधित कर सकता है।  

इलाज ना होने की स्थिति में यह जानने बात नहीं है।  लेकिन समय पर उचित इलाज मिलने पर शिशु साधारण जीवन जीने लायक हो जाता है हलाकि इससे हुआ नुकसान पूरी तरह से ठीक नहीं होता है। 

इसका चिकित्सीय इलाज के दौरान प्लास्टिक की एक ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है जिससे मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid) को मस्तिष्क से हटाकर शरीर के दूसरे  हिस्से में स्थानांतरित कर दिया जाता है जहां यह सरलता से शरीर में अवशोषित हो जाता है। 

जलशीर् से बचाव 

कुछ सावधानियां बरत कर आप अपने बच्चे को जलशीर्ष (Hydrocephalus) की संभावना से बचा सकते हैं। आपको नींद सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • अपने शिशु को Meningitis का टिका समय पर लगवाएं
  • गर्भावस्था के दौरान अपना उचित ख्याल रखें,  डॉक्टर से निश्चित समय अंतराल पर मिलते रहे और उसके बताए हुए सभी दवाओं और सप्लीमेंट को हर दिन समय पर ले। 
  • अगर गर्भावस्था के दौरान आपका डॉक्टर कुछ सुरक्षा उपकरण को इस्तेमाल करने की राय दे तो उसका पालन करें।
  • वाहनों में सफर के दौरान सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें

क्योँ होता है जलशीर्ष - हिंदी में जलशीर्ष के कारणों

जलशीर्ष (Hydrocephalus) कई कारणों से हो सकता है।  लेकिन कुछ मुख्य कारण इस तरह से हैं:

  1. मस्तिष्क में  मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid)  के उत्पादन और  रक्त में उसके अवशोषण के संतुलन बिगड़ने की वजह से। 
  2. सर पर चोट लगने की वजह से
  3. आघात (स्ट्रोक)
  4. मस्तिष्क में रक्त स्राव की वजह से
  5. गर्भ में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के ठीक से विकसित ना होने की वजह से 
  6. निलय के भीतर खून बहना (bleeding within the ventricles)
  7. गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय में संक्रमण
  8. मस्तिष्क और मेरुदंड में ट्यूमर की वजह से
  9. बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस
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