Category: शिशु रोग

नवजात के सिर का आकार सही नहीं है। मैं इसे गोल बनाने

By: Salan Khalkho | 3 min read

नवजात बच्चे के खोपड़ी की हड्डियां नरम और लचीली होती हैं ताकि जन्म के समय वे संकरे जनन मार्ग से सिकुड़ कर आसानी से बहार आ सके। अंग्रेज़ी में इसी प्रक्रिया को मोल्डिंग (moulding) कहते हैं और नवजात बच्चे के अजीब से आकार के सर को newborn head molding कहते हैं।

नवजात के सिर का आकार newborn head molding

क्या?

आप के नवजात बच्चे के सर का आकर सही नहीं है?

क्या आप ये सोच रही हैं की आप अपने शिशु का सर गोल किस तरह बना सकती है?

ठहरिये!

बच्चे के सर का आकर अलग-अलग व अजीब सा आकार होना एकदम सामान्य सा बात है।

जी हाँ - नवजात शिशु का सर टेड़े-मेड़े आकार का होना बिलकुल सामान्य सी बात है। 

समय के साथ यह आपने आप ठीक हो जाता है।

आप यही सोच रही होंगी की - 

नवजात बच्चे का सर और छोटे बच्चों का सर क्योँ अजीब सा आकार का होता है?

वो इसलिए क्यूंकि नवजात बच्चे के खोपड़ी की हड्डियां नरम और लचीली होती हैं। ऐसा इसलिए होता है ताकि जन्म के समय वे संकरे जनन मार्ग से सिकुड़ कर आसानी से बहार आ सके। अंग्रेज़ी में इसी प्रक्रिया को मोल्डिंग (moulding) कहते हैं और नवजात बच्चे के अजीब से आकार के सर को newborn head molding कहते हैं।

बच्चे का सर कब सामान्य आकर का होगा?

शिशु के सर पे कुछ नरम स्थानों (सॉफ्ट स्पॉट) होते हैं। कुछ समय बाद सर की हड्डियोँ के मिलने के पे ये नरम स्थानों (सॉफ्ट स्पॉट) स्वतः ही भर जायेंगे और बच्चे का सर सामान्य आकर का हो जायेगा। 

छोटे बच्चों के सर पे दो स्थान ऐसे होते हैं जो बाकि स्थानों से नरम होते हैं। इन्हे कलांतराल (fontanel) कहते हैं। शिशु के सर पे पीछे वाला कलांतराल (fontanel) लगभग छह सप्ताह (six weeks) में बंद हो जाता है। दूसरा नरम स्थान सर के सामने वाले भाग में स्थित होता है। यह हिस्सा सर की त्वचा पर हल्के से धंसे हुए हिस्से के रूप में छूने पे महसूस किया जा सकता है। इसे बंद होने या ख़त्म होने में काफी समय लगता है। आम तौर पे देखा गया है की यह कम से कम 18 महीने तो लेते ही है बंद होने में। कुछ बच्चों में ज्यादा समय भी लग सकता है। बच्चे का सर आकर में आने में कम समय लगे या ज्यादा, यह कतई चिंता की बात नहीं है। 

शिशु ब्रेकिसेफेली

शिशु के सर के पीछे का हिस्सा समतल होना (ब्रेकिसेफेली)

कुछ बच्चों के सर के पीछे का हिस्सा समतल होता है। यह भी बहुत आम सी बात है। ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि छोटे बच्चों को अक्सर पीठ के बल सुलाया जाता है ताकि उन्हें अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) के खतरे से बचाया जा सके। 

सर के पीछे के हिस्से के समतल होने के तीन कारण - Three reasons

समय पूर्व जन्मे बच्चे (premature baby) - समय से पहले जन्मे बच्चे की हड्डियां पूरी तरह से विकसित नहीं होती हैं। और जो हड्डियां होती हैं, वो भी बहुत नरम होती हैं। ऐसे में प्रसव (delivery) के दौरान प्रसव नलिका से शिशु के बहार आते वक्त उसके सर का आकर बिगड़ने की सम्भावना ज्यादा रहती है। समय पूर्व जन्मे बच्चे को अपने सर का नियंत्रण सँभालने में भी ज्यादा समय लगता है। इसीलिए जब तक समय पूर्व जन्मे बच्चे (premature baby) थोड़े बड़े नहीं हो जाते, उनके सर का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

जुड़वाँ बच्चों में

अगर गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हैं तो सम्भावना है की सभी बच्चों के सर का आकर थोड़ा मोड़ा टेड़े-मेड़े आकार का होगा। आप को बच्चों के सर का ध्यान देने की आवश्यकता है, मगर यह चिंता का विषय नहीं है। मालिश के द्वारा बच्चे के सर को ठीक करने की कोशिश न करें। 

जुड़वाँ बच्चों में twins fontanel

गर्भ में amniotic fluid (oligohydramnios) का कम होना 

जब माँ के गर्भ में  एमनियोटिक द्रव का स्तर कम होता है तो उस स्थिति में बच्चे को हिलने-डुलने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलता है। इस वजह से शिशु गर्भ में उतनी अच्छी स्थिति में नहीं रहता है जितनी की ज्यादा एमनियोटिक द्रव में रहने वाले शिशु होते हैं।

बच्चे के सर के बगल के हिस्से का समतल होना

कभी कभार कुछ बच्चों में सर के साइड का हिस्सा समतल हो सकता है। सर की इस स्तिथि को प्लेजियोसेफेली कहते हैं। इसकी वजह से बच्चे का सर अजीब सा दिख सकता है। मगर यह बिलकुल भी चिंता की बात नहीं है। 

बच्चे के सर के बगल के हिस्से को सामान्य आकर में लाने के लिए क्या करें

  1. जब आप का बच्चा सोता है या खेलता है तब आप उसके सर के स्थिति में बदलाव करते रहिये। हर दिन एक ही स्थिति में दूध न पिलायें। हर दिन एक ही स्थिति में ना सुलाएं। इससे बच्चे के सर को सही आकर में आने में मदद मिलेगी। आप बच्चे को किसी भी स्थिति में सुला सकती हैं मगर ध्यान रखें की आप उसे हमेशा पीट के बल ही सुलाएं। जब बच्चे को आप पीट के बल सुलाएं तो कोशिश करें की सर का वो हिस्सा जो गोल है उसी साइड से बच्चे को सुलाएं। 
  2. बच्चे को बस्तर पे या पलने पे सुलाते वक्त नियमित तौर पर उसके सोने की दिशा को अदला-बदली करती रहे। इससे बच्चा हमेशा एक ही दिशा या स्थिति में नहीं दिखेगा। बच्चे के सोते वक्त उसके पैर उसके पलंग के पैताने को छूने चाहिए जिससे की बच्चे को अकस्मात शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) का खतरा ना हो। 
  3. बच्चे के बिस्तर पे हर समय स्थिति बदल बदल के सुलाने के आलावा आप उसके सभी खिलौनों को हटाकर दूसरी तरफ लगा सकती हैं, जिन्हे आप का शिशु देखना पसंद करता है। 
  4. दिन में जब बच्चा आप की निगरानी में सो रहा हो तब आप उसको करवट लेकर सोने के लिए प्रोत्साहित करें। इस बात का ध्यान रखें की बच्चे की नाक के पास कोई भी वास्तु ना हो जो उसके साँस लेने में अवरोध पैदा करे। 
  5. समय के साथ जैसे जैसे आप के बच्चे के गर्दन की मांसपेशियों मजबूत होने लगे - आप उसे पेट के बल सुलाना शुरू करें। शुरुआत में केवल कुछ मिनिटों (few minutes) के लिए ही सुलाएं। पेट के बल लेटने का यह समय धीरे धीरे बढ़ा कर कम से कम 30 minute का कर सकती हैं आप। 
  6. दिन के समय आप बच्चे को स्लिंग या कैरियर में भी लेके सुला सकती हैं। इससे बच्चे के सर पे उस दौरान कोई भी दबाव नहीं पड़ेगा। बस इस बात का ध्यान रखें की आप के बच्चे का सर इस स्थिति में हो की आप अपना सर निचे कर अपने बच्चे को देख सकें। स्लिंग तना हुआ हो ताकि आपकी पीठ को आधार मिल सके। इस बात का भी ध्यान रखें की बच्चे की ठोड़ी उसकी छाती पर ना लगी हुई हो। 

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