Category: प्रेगनेंसी

सिजेरियन डिलीवरी के बाद देखभाल के 10 तरीके

By: Editorial Team | 8 min read

शिशु का जन्म पूरे घर को खुशियों से भर देता है। मां के लिए तो यह एक जादुई अनुभव होता है क्योंकि 9 महीने बाद मां पहली बार अपने गर्भ में पल रहे शिशु को अपनी आंखों से देखती है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद देखभाल के 10 तरीके

लेकिन साथ ही शिशु का जन्म शारीरिक तौर पर काफी थका देने वाला और तकलीफ  देने वाला अनुभव होता है -  विशेष तौर पर अगर आप भी शिशु को जरा सी सेक्शन डिलीवरी के द्वारा दिया है। 

 हम आपको यहां पर सिजेरियन डिलीवरी के बाद देखभाल के 10 तरीके बता रहे हैं जिससे डिलीवरी के बाद की शारीरिक रिकवरी बहुत तेज हो सके, ताकि आप अपना ज्यादा समय शिशु के साथ भावनात्मक रिश्ता स्थापित करने में लगा सके। 

इस लेख मे : 

1. पर्याप्त मात्रा में आराम करें

सिजेरियन डिलीवरी एक बड़ा ऑपरेशन है।  ऑपरेशन के द्वारा पेट के निचले हिस्से में बने घाव को भरने के लिए शरीर को आराम की आवश्यकता है।  

पर्याप्त मात्रा में आराम करें

सी सेक्शन डिलीवरी के बाद यही वजह है कि आपको तीन से चार दिन तक अस्पताल में ही रुकना पड़ेगा।  हो सकता है ज्यादा भी रुकना पड़े अगर किसी प्रकार का कॉम्प्लिकेशन हो तो। 

मां बनने के बाद जीवन में जो सबसे बड़ा बदलाव आता है वह यह है कि शिशु के जन्म के प्रथम 1 साल आपके लिए समय बहुत व्यस्त होने वाला है जहां आपका पूरा समय शिशु की देखभाल में निकल जाएगा। इस दौरान समय के अभाव की वजह से हो सकता है कई महीनों तक आपको  नींद पूरी करने का मौका भी ना मिले। 

 इसीलिए जब भी मौका मिले आपको आराम कर ले।  जब भी आपका शिशु थोड़ी देर के लिए सोए,  आप भी सो लें ताकि आपके शरीर को थोड़ा आराम मिल सके। दिन भर में कई बार थोड़े-थोड़े मिनट के लिए भी आराम करना आपके शरीर के लिए फायदेमंद होगा। 

2. अपने शरीर का विशेष ध्यान रखें

जब तक सिजेरियन डिलीवरी की वजह से बने घाव पूरी तरह भर ना जाएं तब तक  कोई ऐसा काम ना करें जिससे आपके शरीर पर अनावश्यक तनाव पड़े।  

अपने शरीर का विशेष ध्यान रखें

इस दौरान आपके लिए बहुत ज्यादा सीढ़ियां चढ़ना और पानी से भरी बाल्टी या उठाना बेहतर नहीं है। इससे आपके शरीर पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा। अपने शिशु के वजन से ज्यादा भारी कोई भी समान ना उठाएं। 

जब भी आपको खांसी आए या आप छींके,  तो अपने पेट को हाथों से पकड़ ले ताकि सी सेक्शन के घाव पर जोर ना पड़े। 

पूरी तरह से ठीक होने में आपको 8 सप्ताह तक का समय लग जाएगा और इसके बाद धीरे-धीरे आपकी दिनचर्या सामान्य हो जाएगी।  अपने डॉक्टर से इस बारे में जरूर राय लें कि आप सब शारीरिक व्यायाम कर सकती हैं या अपने काम पर वापस लौट सकती हैं। 

कोई भी ऐसा एक्सरसाइज ना करें जिससे शरीर पर तनाव पड़े, लेकिन  शारीरिक तौर पर फिट रहने के लिए हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना जरूरी है जैसे हर दिन सुबह या शाम को आप कुछ देर के लिए टहल सकती है।  इस प्रकार की शारीरिक  क्रियाकाल्प  आपके शरीर को कब्ज की समस्या से बचाएगी और साथी खून के थक्के को बनने से भी रुकेगी। 

3. दर्द को कम करने की दवा

सिजेरियन डिलीवरी के बाद शारीरिक दर्द रह सकता है ऐसे में आप अपने डॉक्टर से दर्द को कम करने की दवा के बारे में परामर्श कर सकती हैं।

दर्द को कम करने की दवा

 अगर शिशु को स्तनपान करा रही हैं तो डॉक्टर से इस बारे में जरूर आए ले ले क्योंकि यह जानना जरूरी है की दर्द की दवा का कहीं कोई असर शिशु पर तो नहीं पड़ेगा। 

इसके अलावा दर्द को कम करने के लिए आप हीटिंग पैड (heating pad) का भी इस्तेमाल कर सकती है। 

पौष्टिक आहार पर ध्यान दें 

शिशु के जन्म के बाद आपके शरीर की पोषण की आवश्यकता और ज्यादा बढ़ जाती है।  जो आहर आप ग्रहण करती हैं उससे आपके शरीर को पोषण मिलता है और साथ में आपकी शिशु को भी।  जब तक आप अपने शिशु को स्तनपान करा रही हैं आपको अपने पोषण का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। 

 बहुत ज्यादा मसालेदार या मीठे आहार का सेवन ना करें क्योंकि इससे शिशु के पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ेगा। जो भी आहार अब ग्रहण करें, यह देखने की कोशिश करें कि उसका आपके शिशु पर क्या प्रभाव पड़ा।  जो आहार आपके शिशु में कब्ज की समस्या पैदा करते हैं ऐसे आहार को ग्रहण ना करें।  अगर आप खाएं कि कुछ आहार ग्रहण करने पर अगर आप का शिशु स्तनपान के बाद चिडचिडे स्वभाव का हो जाता है -  तो उस प्रकार के आहार को भी ना करें। 

दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी की है।  कम पानी पीने से आपका शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है जो आपके दूध निर्माण की छमता को भी प्रभावित करेगा।  पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से आपको कॉन्स्टिपेशन की प्रॉब्लम भी नहीं रहेगी। 

4. इन परिस्थितियों में डॉक्टर से तुरंत मिले

सिजेरियन डिलीवरी के बाद अपनी शारीरिक अवस्था का ठीक तरह से  देखभाल करने के लिए आपको यह भी समझना होगा कि  कौन कौन सी अवस्था में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

सिजेरियन डिलीवरी के बाद छेह सप्ताह तक घाव से खून बहना या तरल द्रव का निकलना सामान्य बात है। लेकिन अगर आप आपको निम्न बताए गए लक्षण या परेशानी का सामना करना पड़े,  तो तुरंत डॉक्टर की सहायता प्राप्त करें। 

  1. अगर आप सीरियल के घाव में लालिपन,  सूजन,  या उसमें से पस निकलता देखें,  तो यह समझने की घाव पक रहा है और आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।  यह संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं।
  2. घाव के चारों ओर की हिस्से पर अगर आपको दर्द का एहसास हो
  3. अगर आप को 100.4°F (38°C) बुखार है।
  4. आप के योनी से बदबूदार द्रव निकल रहा है। 
  5. योनी से भारी मात्र में रक्तस्राव
  6.  पैरों में सुजन और लालिपन
  7. साँस लेने में कठिनाई
  8. छाती में दर्द
  9. स्तनों में दर्द 

यह सभी ऐसे लक्षण हैं जिन्हें आप को गंभीरता से लेने चाहिए।  अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे या इस प्रकार की किसी की समस्या का सामना करना पड़े तो आप तुरंत चिकित्सक  से परामर्श करें। 

अपने घाव और ड्रेसिंग का पूरा ख्याल रखें

5. अपने घाव और ड्रेसिंग का पूरा ख्याल रखें

शिशु के जन्म के तुरंत बाद घाव ताजे होते हैं और इस समय आपको अपने घाव के ड्रेसिंग का पूरा ध्यान रखना पड़ेगा। सिजेरियन के घाव को संक्रमण से बचाने के लिए कुछ दिनों तक ना नहाए।  घाव पर पानी पड़ने से उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अगर घाव को भरने से पहले आपको नहाना पड़े तो आप घाव वाली जगह को अच्छी तरह से ढक कर  नहाना चाहिए है। 

कपड़ों का भी रखें विशेष ध्यान

6. कपड़ों का भी रखें विशेष ध्यान

 डिलीवरी के बाद आपको अपने कपड़ों का भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता पड़ेगी।  शिशु के जन्म के बाद आप ज्यादा कसे हुए कपड़े नहीं पहने। आप ऐसी भी कपड़े ना पहने जिनसे चुभन हो।  जितना ज्यादा हो सके ढीले ढाले,  और खुले-खुले कॉटन के कपड़े पहने। 

सही तरह से उठने और बैठने का भी ध्यान रखें

7.  सही तरह से उठने और बैठने का भी ध्यान रखें

 ऑपरेशन के बाद जब तक घाव भर नहीं जाता है,  तब ना तो  एकदम से बैठ जाएं और ना ही एकदम से खड़े हो जाएं।  सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद टांके और घाव हल्के होते हैं।  अचानक से बैठने पर या खड़े हो जाने पर टांको के टूटने का डर होता है।  सोते वक्त भी आप को हल्के से करवट लेनी चाहिए।  डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन के 4 से 6 हफ्ते तक आपके पेट पर खिंचाव घातक हो सकता है इसीलिए पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।  2 सप्ताह के बाद से आप हल्का फुल्का चलना शुरू कर सकती हैं,  लेकिन ऐसा करने से पहले अपने डॉक्टर से एक बार जरूर पूछ लें। 

पैरों के बल झुक कर कोई काम ना करें

8. पैरों के बल झुक कर कोई काम ना करें

 पैरों के बल झुक कर काम करने से पेट पर दबाव बनता है जिससे टांके और घाव दोनों पर असर पड़ता है।  शुरुआत के कुछ सप्ताह तक आपको झुक कर कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे आपकी पेट पे भार पड़े। 

कुछ दिनों तक पति के साथ शारीरिक सम्बन्ध ना बनायें

9. कुछ दिनों तक पति के साथ शारीरिक सम्बन्ध ना बनायें

कहा जाता है की शिशु के जन्म के साथ ही माँ का भी नया जन्म होता है। यह इस लिए कहा जाता है क्योंकि शिशु के जन्म के बाद महिलाओं के शरीर में बहुत प्रकार के परिवर्तन होते हैं। अगर शिशु का जन्म सिजेरियन डिलीवरी के जरिये हुआ है तो और भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जब तक घाव अच्छी तरह से ना भर जाये, पति के साथ शारीरिक सम्बन्ध ना बनाये। इससे संक्रमण का खतरा रहता है और कई प्रकार के कॉम्प्लिकेशन भी हो सकते हैं। 

संतुलित आहार पे जोर दें

10. संतुलित आहार पे जोर दें

शिशु के जन्म के बाद आपको अपने पोषण का बहुत ध्यान रखने की आवश्यकता है।  आपके लिए इस समय संतुलित आहार बहुत जरूरी है।  शिशु पूरी तरह से अपने आहार के लिए आप पर निर्भर है इसीलिए इस दौरान आपका खान-पान ऐसा होना चाहिए जो शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा हो। 

Terms & Conditions: बच्चों के स्वस्थ, परवरिश और पढाई से सम्बंधित लेख लिखें| लेख न्यूनतम 1700 words की होनी चाहिए| विशेषज्ञों दुवारा चुने गए लेख को लेखक के नाम और फोटो के साथ प्रकाशित किया जायेगा| साथ ही हर चयनित लेखकों को KidHealthCenter.com की तरफ से सर्टिफिकेट दिया जायेगा| यह भारत की सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली ब्लॉग है - जिस पर हर महीने 7 लाख पाठक अपनी समस्याओं का समाधान पाते हैं| आप भी इसके लिए लिख सकती हैं और अपने अनुभव को पाठकों तक पहुंचा सकती हैं|

Send Your article at mykidhealthcenter@gmail.com



ध्यान रखने योग्य बाते
- आपका लेख पूर्ण रूप से नया एवं आपका होना चाहिए| यह लेख किसी दूसरे स्रोत से चुराया नही होना चाहिए|
- लेख में कम से कम वर्तनी (Spellings) एवं व्याकरण (Grammar) संबंधी त्रुटियाँ होनी चाहिए|
- संबंधित चित्र (Images) भेजने कि कोशिश करें
- मगर यह जरुरी नहीं है| |
- लेख में आवश्यक बदलाव करने के सभी अधिकार KidHealthCenter के पास सुरक्षित है.
- लेख के साथ अपना पूरा नाम, पता, वेबसाईट, ब्लॉग, सोशल मीडिया प्रोफाईल का पता भी अवश्य भेजे.
- लेख के प्रकाशन के एवज में KidHealthCenter लेखक के नाम और प्रोफाइल को लेख के अंत में प्रकाशित करेगा| किसी भी लेखक को किसी भी प्रकार का कोई भुगतान नही किया जाएगा|
- हम आपका लेख प्राप्त करने के बाद कम से कम एक सप्ताह मे भीतर उसे प्रकाशित करने की कोशिश करेंगे| एक बार प्रकाशित होने के बाद आप उस लेख को कहीं और प्रकाशित नही कर सकेंगे. और ना ही अप्रकाशित करवा सकेंगे| लेख पर संपूर्ण अधिकार KidHealthCenter का होगा|


Important Note: यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो kidhealthcenter.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है।

ADHD-शिशु
गणतंत्र-दिवस-essay
बोर्ड-एग्जाम
लर्निंग-डिसेबिलिटी-Learning-Disabilities
बच्चों-में-तुतलाने
-देर-से-बोलते-हैं-कुछ-बच्चे
गर्भावस्था-में-उलटी
प्रेग्नेंसी-में-उल्टी-और-मतली
सिजेरियन-या-नार्मल-डिलीवरी
यूटीआई-UTI-Infection
गर्भपात
डिलीवरी-के-बाद-पेट-कम
डिलीवरी-के-बाद-आहार
होली-सिखाये-बच्चों
स्तनपान-आहार
स्तनपान-में-आहार
बालों-का-झाड़ना
प्रेगनेंसी-के-दौरान-गैस
प्रेगनेंसी-में-हेयर-डाई
अपच-Indigestion-or-dyspepsia
गर्भावस्था-(प्रेगनेंसी)-में-ब्लड-प्रेशर-का-घरेलु-उपचार
गर्भधारण-का-उपयुक्त-समय-
बच्चे-में-अच्छा-व्यहार-(Good-Behavior)
शिशु-के-गले-के-टॉन्सिल-इन्फेक्शन
गर्भावस्था-में-बालों-का-झड़ना
बच्चों-का-गुस्सा
क्या-गर्भावस्था-के-दौरान-Vitamins-लेना-सुरक्षित-है
बालों-का-झाड़ना
बालों-का-झाड़ना
बालों-का-झाड़ना

Most Read

sardi-jukam
सर्दी-जुकाम-की-दवा
कफ-निकालने-के-उपाय
balgam-wali-khansi-ka-desi-ilaj
नेबुलाइजर-Nebulizer-zukam-ka-ilaj
ह्यूमिडिफायर-Humidifier
पेट्रोलियम-जैली---Vaseline
Khasi-Ke-Upay
खांसी-की-अचूक-दवा
पराबेन-(paraben)
Khasi-Ki-Dawai
sardi-ki-dawa
jukam-ki-dawa
खांसी-की-अचूक-दवा
जुकाम-के-घरेलू-उपाय
khasi-ki-dawa
बंद-नाक
कई-दिनों-से-जुकाम
शिशु-को-खासी
शिशु-खांसी-के-लिए-घर-उपचार
बच्चों-की-नाक-बंद-होना
Best-Baby-Carriers
शिशु-सर्दी
शिशु-बुखार
1-साल-के-बच्चे-का-आदर्श-वजन-और-लम्बाई
नवजात-शिशु-वजन
शिशु-का-वजन-घटना
शिशु-की-लम्बाई
बच्चों-का-BMI
नवजात-शिशु-का-BMI
6-महीने-के-शिशु-का-वजन
शिशु-का-वजन-बढ़ाये-देशी-घी
शिशु-को-अंडा
शिशु-को-देशी-घी
देसी-घी
नवजात-शिशु-का-Infant-Growth-Percentile-Calculator
शिशु-का-वजन-बढ़ाएं
BMI-Calculator
गर्भ-में-लड़का-होने-के-लक्षण-इन-हिंदी
लड़की-का-आदर्श-वजन-और-लम्बाई
4-महीने-के-शिशु-का-वजन
ठोस-आहार
डिस्लेक्सिया-Dyslexia
मॉर्निंग-सिकनेस
एडीएचडी-(ADHD)
benefits-of-story-telling-to-kids
बच्चों-पे-चिल्लाना
जिद्दी-बच्चे
सुभाष-चंद्र-बोस
ADHD-में-शिशु

Other Articles

Footer