Category: शिशु रोग

शिशु में फ़ूड पोइजन (Food Poison) का घरेलु इलाज

By: Editorial Team | 7 min read

जब शिशु हानिकारक जीवाणुओं या विषाणु से संक्रमित आहार ग्रहण करते हैं तो संक्रमण शिशु के पेट में पहुंचकर तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं और शिशु को बीमार कर देते हैं। ठीक समय पर इलाज ना मिल पाने की वजह से हर साल भारतवर्ष में हजारों बच्चे फूड प्वाइजनिंग की वजह से मौत के शिकार होते हैं। अगर समय पर फूड प्वाइजनिंग की पहचान हो जाए और शिशु का समय पर सही उपचार मिले तो शिशु 1 से 2 दिन में ही ठीक हो जाता है।

शिशु में फ़ूड पोइजन (Food Poison) का घरेलु इलाज

 इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किस प्रकार से आप फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों को पहचान सकती हैं और घर पर ही फूड प्वाइजनिंग का ट्रीटमेंट भी कर सकती है।  फूड प्वाइजनिंग जिसे विषाक्त भोजन कहा जाता है  - इसका इलाज आसानी से घरेलू उपचार के माध्यम से किया जा सकता है।

इस लेख मे : 

  1. बच्चे आसानी से फूड प्वाइजनिंग के शिकार होते हैं
  2. फूड प्वाइजनिंग क्यों बच्चों के लिए बन जाता है जानलेवा
  3. फूड प्वाइजनिंग के लक्षण
  4. घर पे फ़ूड पोइज़निंग का ट्रीटमेंट
  5. फूड प्वाइजनिंग की गंभीर परिस्थिति में
  6. विषाक्त भोजन के लिए घरेलू उपचार
  7. फूड प्वाइजनिंग में कब डॉक्टर की मदद लें
  8. फूड प्वाइजनिंग में इमरजेंसी वाली स्थिति
  9. फूड प्वाइजनिंग से बचाव

बच्चे आसानी से फूड प्वाइजनिंग के शिकार होते हैं

फूड प्वाइजनिंग का शिकार कोई भी हो सकता है,  लेकिन बच्चे सबसे आसानी से इसके शिकार हो जाते हैं क्योंकि उनका शरीर बड़ों की तुलना में कमजोर होता (कमजोर रोग प्रतिरोधक तंत्र प्रणाली) है और हानिकारक तत्वों से लड़ने में सक्षम नहीं होता है।बच्चे आसानी से फूड प्वाइजनिंग के शिकार होते हैं

 लेकिन अगर शिशु को  पोषण से भरपूर आहार मिले तो उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक तंत्र तेजी से विकसित  होगा और शरीर में प्रवेश करने वाले रोगाणुओं और  विषाणुओं (bacteria and viruses) से लड़ने में सक्षम बनेगा। 

पढ़ें: शिशु में Food Poisoning का इलाज - घरेलु नुस्खे

फूड प्वाइजनिंग क्यों बच्चों के लिए बन जाता है जानलेवा

फूड प्वाइजनिंग क्यों बच्चों के लिए बन जाता है जानलेवा

 इसके तीन कारण है।  पहला -  बड़ों की तुलना में बच्चों के पेट में ‘पाचन संबंधी एसिड’ (stomach acid) कम होता है जो आहार में मौजूद जीवाणु और विषाणु को नष्ट कर सके। दूसरा -  शिशु का शरीर बहुत छोटा होता है और बार-बार दस्त (diarrhea) करने की वजह से उसके शरीर में जल का स्तर बहुत घट जाता है जिससे डिहाइड्रेशन की वजह से उसका जान का खतरा बढ़ जाता है। तीसरा -  शिशु के शरीर में रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है और इतना सक्षम नहीं होता है कि वह  रोगाणुओं और विषाणुओं से शरीर की रक्षा कर सकें। 

फूड प्वाइजनिंग के लक्षण

रोगाणुओं या विषाणु से संक्रमित आहार ग्रहण करने के बाद फूड प्वाइजनिंग के लक्षण  दिखने में आधे घंटे से लेकर 2 दिन  तक का समय लग सकता है।

फूड प्वाइजनिंग के लक्षण

 

फूड प्वाइजनिंग की कई प्रकार के कारण हो सकते हैं और अलग-अलग कारणों के अलग-अलग लक्षण भी हो सकते हैं। लेकिन फिर भी कुछ लक्षण ऐसे हैं जो लगभग हर प्रकार के फूड पॉइजनिंग  की घटनाओं में देखे जा सकते हैं।  यह किस प्रकार से हैं - 

  • मितली
  •  उलटी 
  •  पतला दस्त
  •  पेट में दर्द,  ऐठन एवं मरोड़न  
  •  बुखार
  • शारीरिक कमजोरी 
  •  सर दर्द

घर पे फ़ूड पोइज़निंग का ट्रीटमेंट 

बच्चों में फूड प्वाइजनिंग के अधिकांश मामलों में या बिना किसी उपचार के खुद ही ठीक हो जाता है।  लेकिन क्योंकि बच्चों का शरीर कमजोर होता है, इसीलिए यह आवश्यक है कि आप अपने शिशु को विषाक्त भोजनके लक्षण दिखने पर तुरंत ‘बाल शिशु रोग  विशेषज्ञ’ के पास लेकर जाएं।  ताकि समय पर शिशु का सही उपचार हो सके। 

घर पे फ़ूड पोइज़निंग का ट्रीटमेंट

अगर आपके शिशु को बार बार पतला दस्त और उल्टी हो रहा है तो बिना समय कमाए डॉक्टर के पास तुरंत लेकर जाएं क्योंकि इससे शिशु के शरीर में डिहाइड्रेशन होने की संभावना है। यह फूड प्वाइजनिंग की गंभीर स्थिति है।  ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर आपके शिशु को इंजेक्शन के माध्यम से IV  देगा,  या फिर अगर शिशु कचरी सक्षम है तो उसे ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन देने की सलाह देगा। 

 इससे शिशु के शरीर में electrolytes  का स्तर फिर से सामान्य होने में मदद मिलेगा। IV या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन में मिनरल्स होते हैं जो शरीर में electrolytes  का काम करते हैं।  मुख्य था यह मंदिर सोडियम और पोटैशियम होते हैं।  यह शरीर में दिल की धड़कन को नियंत्रित करने और सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं।  यह शरीर में जल के स्तर को भी बनाए रखने में मदद करते हैं। 

फूड प्वाइजनिंग की गंभीर परिस्थिति में

कुछ जीवाणुओं द्वारा शिशु के शरीर में  फूड प्वाइजनिंग गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है। यह मुख्यता listeria नामक बैक्टीरिया की वजह से होता है। 

फूड प्वाइजनिंग की गंभीर परिस्थिति में 

इस परिस्थिति में आपके शिशु का डॉक्टर आपके शिशु को एंटीबायोटिक (antibiotics) भी दे सकता है। लेकिन अगर आपके शिशु का रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर नहीं है तो फूड प्वाइजनिंग के अधिकांश मामलों में आपकी शिशु को एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

  शिशु का शरीर उनसे खुद ब खुद निपट लेने में सक्षम होता है।  हां लेकिन शिशु के शरीर को इनसे निपटने में एक से 2 दिन का समय लग जाता है। 

विषाक्त भोजन के लिए घरेलू उपचार

फूड प्वाइजनिंग में शिशु का सबसे बेहतरीन घरेलू उपचार है कि उसे हर थोड़ी थोड़ी देर पर आप चम्मच से चीनी पानी का घोल पिलाते रहे या सर द्वारा बताए गए तरीके से ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन  देते रहे।  यीशु के शरीर में जल का स्तर कम नहीं होगा और उसे  डिहाइड्रेशन का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

चीनी पानी का घोल पिलाते रहे

  1. अगर आप किसी से को फूड प्वाइजनिंग हो गया है तो अपने शिशु को तब तक दूध,  कॉफी,  या कोल्डड्रिंक ना पीने को दें जब तक कि आपका शिशु पूरी तरह स्वस्थ ना हो जाए। अगर शिशु 6 महीने से छोटा है तो आप उसे स्तनपान कराते रहे। अगर आप  के शिशु का डॉक्टर आपकी 6 माह से छोटे बच्चे को ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन  देने की सलाह देता है तो उसके बताए हुए निर्देशों का पालन करें।  छह माह से बड़े बच्चों को दूध ना दे,  उन्हें इसके बदले ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन  दें,  आहार में आप उन्हें पतला खिचड़ी और सब्जियों का सूप दे सकती है। 
  2. शिशु में फूड प्वाइजनिंग के लक्षण दिखने पर पहले कई घंटों तक अपने शिशु को कुछ भी खाने को ना दें।  लेकिन थोड़ा थोड़ा ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन  थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहे। जब शिशु को थोड़ा भूख लगे तो उसे हलका आहार जैसे पटना खिचड़ी खाने के लिए दे।  शिशु को इस दौरान कोई भी ऐसा आहार ना दें जिसमें तेल का इस्तेमाल किया गया हो या जो आहार पचाने में शिशु के पेट को बहुत मेहनत करना पड़े। 
  3. फूड प्वाइजनिंग के दौरान शिशु को जितना हो सके आराम करने दें।  इस दौरान उसे स्कूल ना भेजें और ना ही उसे दौड़ भाग वाले खेल करने दे।  शिशु के कमरे में टीवी ना चलाएं ताकि शिशु ज्यादा से ज्यादा समय सो सके।  जितना ज्यादा शिशु  के शरीर को आराम मिलेगा उतना जल्दी वह ठीक हो सकेगा। 

फूड प्वाइजनिंग में कब डॉक्टर की मदद

फूड प्वाइजनिंग में कब डॉक्टर की मदद लें

  • अगर शिशु 5 साल से छोटा है तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। ऐसे बच्चे फूड पॉइजनिंग से लड़ने में शारीरिक रूप से तैयार नहीं होते हैं।  
  • अगर आपको समझ में नहीं आ रहा है कि  क्या करें,  तो तुरंत अपने शिशु को डॉक्टर के पास लेकर जाएं।
  •  शिशु का मुंह सूख गया है और उसकी हूं चिपक रहे हैं तो भी आप अपने शिशु को तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं क्योंकि इसका मतलब यह है कि आप के शिशु में डिहाइड्रेशन हो रहा है।  डिहाइड्रेशन की वजह से शिशु का जान भी जा सकता है या उसके दिमाग पर असर भी पड़ सकता है। 
  •  अगर आपकी शिशु को बहुत ज्यादा प्यास लग रहा है तो भी बेहतर यही है कि आप अपने शिशु को डॉक्टर के पास लेकर जाएं या अस्पताल में भर्ती का। 
  • अगर शिशु की आंखें या आंखों के चारों ओर का हिस्सा धंसा हुआ लगे तो इसका मतलब आपका शिशु डिहाइड्रेशन के बहुत गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है।  थोड़ी भी देरी शिशु के लिए जानलेवा हो सकती है।
  •  हां रोते वक्त शिशु की आंखों से पानी नहीं निकल रहा है,  यह एक लक्षण है जो यह बताता है कि शिशु के शरीर में पानी की कमी हो रही है। 
  •  शिशु बहुत कमजोर दिख रहा है या ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शिशु को बहुत नींद आ रहा (dizziness) है।
  •  बहुत देर से शिशु को कोई पेशाब नहीं हो रहा है
  •  शिशु की दिल की धड़कन बहुत ज्यादा बढ़ गई है
  • शिशु के सर पर जो मुलायम जगह होती है वह थोड़ी धंसी हुई प्रतीत हो रही है -  तो इसका मतलब शिशु में डिहाइड्रेशन हो रहा है। 

फूड प्वाइजनिंग में इमरजेंसी वाली स्थिति

 हम आपको कुछ ऐसी स्थितियों के बारे में बता रहे हैं जो अगर आप अपने बच्चे में देखें तो तुरंत उसे नजदी अस्पताल में लेकर जाएं।

फूड प्वाइजनिंग में इमरजेंसी वाली स्थिति

  • अगर आपके शिशु की उल्टी में खून निकल रहा है यह आपका शिशु खून की उल्टी कर रहा है
  • शिशु के मन में भी अगर आपको खून दिखाई दे तो यह भी चिंताजनक स्थिति है
  • अगर फूड प्वाइजनिंग की वजह से शिशु को ठीक ठीक दिखाई नहीं दे रहा है (Blurry vision)
  • दस्त हो रहा है और उसका बुखार 101 F या इससे ज्यादा बढ़ा हुआ है
  •  पेट में तेज़ ऐठन  जो मल त्याग के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है
  •  मांसपेशियों में कमजोरी तथा शिशु को सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है
  •  12 घंटे से शिशु की उल्टी रुक नहीं रही है
  •  हाथ पैरो में झुनझुनाहट 

फूड प्वाइजनिंग से बचाव

फूड प्वाइजनिंग से बचाव

  • बच्चों को सिखाएं की आहार ग्रहण करने से पहले वह अपने हाथों को ठीक तरह से धोएं।  जब भी वे बाथरूम से आए,  या खेल कूद के बाद अपने हाथों को ठीक से धोएं।
  • आहार तैयार करते समय  आप भी अपने हाथों को ठीक तरह से धोएं। 
  • अच्छी तरह से पके हुए आहार बच्चों को खिलाएं। 
  • जब भी आप ग्रॉसरी शॉपिंग के लिए जाएं तो आहार खरीदते समय  डब्बे पर अंकित एक्सपायरी डेट जरूर देख लें। 
  • ऐसी कोई भी आहार ना खुद खाएं और ना बच्चों को खिलाएं जिसमें से बांसीपन की महक आ रही हो या देखने से ऐसा लग रहा हो कि आहार खराब हो गया है। 
  • फल और सब्जियों को पकाने से पहले अच्छी तरह से धो लें।
  •  दूध को उबालकर बच्चों को पीने को दें।
  • अगर आपको उल्टी और दस्त हो रहा है तो आप तब तक परिवार के बाकी सदस्यों के लिए आहार तैयार ना करें जब तक कि आप पूर्ण रुप से ठीक ना हो जाए।  संभावना है कि आहार तैयार करते समय आप से संक्रमण घर के बाकी सदस्यों को भी फैल सकता है विशेषकर छोटे बच्चों को। 
  • अगर आपके घर में पालतू पशु हैं तो घर के सभी सदस्यों को समझाएं कि पालतू जानवरों को छूने के बाद अपने हाथों को ठीक तरह से धो लें। 

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