Category: स्वस्थ शरीर

नवजात शिशुओं के कब्ज की समस्या का घरेलु उपचार

By: Admin | 2 min read

नवजात शिशु में कब्ज की समस्या होना एक आम बात है। लेकिन कुछ घरेलु टिप्स के जरिये आप अपने शिशु के कब्ज की समस्या को पल भर में दूर कर सकेंगी। जरुरी नहीं की शिशु के कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए दावा का सहारा लिया जाये। नवजात शिशु के साथ-साथ इस लेख में आप यह भी जानेंगी की किस तरह से आप बड़े बच्चों में भी कब्ज की समस्या को दूर कर सकती हैं।

10 टिप्स - नवजात शिशुओं में कब्ज की समस्या का तुरंत समाधान

नवजात शिशु जन्म के 24 घंटे के अंदर पहली बार  मल त्याग करता है। यह मल दिखने में काले रंग का होता है। जो शिशु कब्ज की समस्या से ग्रसित होते हैं उन्हें पहली बार मल त्याग करने में थोड़ी तकलीफ होती है। 

इसकी वजह यह है कि या तो उनका मल जरूरत से ज्यादा सूखा गया है जिसकी वजह से वे उसे आसानी से नहीं निकाल पा रहे हैं या या फिर कोई और वजह भी हो सकती है जिसकी वजह से बच्चे मल त्याग नहीं कर पा रहा है। 

इस दशा को कोलिक कहते हैं। शिशु के लिए यह एक बहुत ही पीड़ादायक अवस्था होता होती है। हालांकि यह एक आस्थाई दशा (temporary situation) है लेकिन फिर भी शिशु के लिए यह एक गंभीर कब्ज की समस्या है। 

कब्ज की समस्या से पीड़ित नवजात शिशु को पहली बार अपना मल त्याग करने में बहुत ताकत लगानी पड़ती है।  शिशु के पैरों को उनके पेट की तरफ ले जाने से उन्हें मल त्याग करने में थोड़ा आराम मिलता है।

लेकिन इस दौरान आप पाएंगे कि शिशु का चेहरा जोर लगाने की वजह से लाल पड़ जाता है।  ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान शिशु अत्यंत पीड़ा की अवस्था से गुजर रहा होता है। कई बार मल के सख्त हो जाने के कारण शिशु के मलाशय की दीवार भी फट सकती है जिसकी वजह से मल के साथ खून भी निकल सकता है। 

शिशुओं में कब्ज (कॉन्स्टिपेशन)

शिशु की यह दशा देखकर अभिभावकों का चिंतित होना स्वाभाविक है। अगर आपका भी नवजात शिशु कब्ज की समस्या से जूझ रहा है तो हम आपको 10 आसान टिप्स बताने जा रहे हैं। 

  1. शिशु के जन्म के तुरंत बाद जो मल वह त्याग करता है वह गाढ़ा हरे रंग का या काले रंग का होता है जिसे मिकोनियम कहते हैं। आने वाली 3 दिन के अंदर  शिशु का पॉटी सामान्य रूप से चालू हो जाना चाहिए।  लेकिन अगर 3 दिन के बाद भी शिशु समान रूप से मल त्याग करना शुरू नहीं करता है और अभी भी उसके मल त्याग के दौरान मिकोनियम निकलता है तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि शिशु को पर्याप्त रूप से आहार नहीं मिल पा रहा है। 
  2. इस स्थिति में आपको शिशु के डॉक्टर से मिलना चाहिए।  इसकी वजह यह हो सकती है कि मां के स्तनों से शिशु के लिए पर्याप्त दूध नहीं आ रहा है और शिशु को अलग से कृत्रिम दूध देने की आवश्यकता है। शिशु को जब भरपेट मां का दूध नहीं मिलता है तब भी शिशु को कब्ज की समस्या होती है। इसीलिए शिशु को कब्ज की समस्या से बचाने के लिए यह जरूरी है कि स्तनपान के जरिए उसका पेट पूरी तरह भर जाये। 
  3. अगर शिशु को ऊपरी दूध दिया जा रहा है यानी कि डब्बा बंद पाउडर दूध।  तो इस वजह से भी शिशु को कब्ज की समस्या हो सकती है।  ऐसे में आप शिशु को दिया जाने वाला दूध का ब्रांड बदल कर देखिए।  हो सकता है शिशु को जिस ब्रांड का दूध दिया जा रहा है वह उसके पाचन तंत्र के लिए सही नहीं है। संभावना है कि शिशु को दूसरे ब्रांड के दूध आसानी से पच सके। ऐसी स्थिति में दूसरे ब्रांड का दूध शिशु के लिए एक बेहतर दूध  का विकल्प होगा।
  4. शिशु के कब्ज की समस्या को अधिकांश मामलों में उसके खानपान में बदलाव के जरिए ठीक किया जा सकता है।  अगर आप शिशु को फॉर्मूला दूध दे रहे हैं तो कोशिश करे की शिशु को दिन-भर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फॉर्मूला दूध देते रहें। ताकि दिनभर शिशु का पेट भरा रहे।
  5. जो बच्चे पूर्ण रूप से फार्मूला दूध पर निर्भर होते हैं उन्हें सामान्य से ज्यादा आहार प्राप्त करने की जरूरत पड़ती है।  इसीलिए अपनी तरफ से आप कोशिश करें कि आपके शिशु को फार्मूला मिल्क की एक अतिरिक्त बोतल दिन भर में मिल सके। इससे आपके शिशु को कब्ज में आराम मिलेगी क्योंकि उसे फार्मूला मिल्क के जरिए पानी की अतिरिक्त मात्रा मिल रही है। 
  6. शिशु को टब या सिंक में नहलाने से भी उसे कब्ज की समस्या से आराम मिलता है। लेकिन टब या सिंक में पानी बच्ची के पेट के स्तर से ऊपर तक भरना चाहिए। 
  7. थोड़ी गुनगुने पानी से शिशु को नहलाते वक्त अगर उसके पेट की मालिश की जाए तो भी बच्चे की आंत उत्तेजित हो जाती है और उसे मल त्यागने में आसानी होती है जिससे बच्चे को कब्ज से राहत मिलता है।
  8. कई बार शिशु को फार्मूला मिल्क में मौजूद आयरन की वजह से भी कब्ज की समस्या हो सकती है। ऐसी अवस्था में अपने शिशु को किसी बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।  आप शिशु के फार्मूला मिल्क को बदल कर भी देख सकते हैं जिसमें आयरन की मात्रा कम हो।  लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि शिशु के  मानसिक और शारीरिक विकास के लिए आयरन बहुत ज्यादा जरूरी है।  कम आयरन वाले फार्मूला मिल्क शिशु के विकास को बाधित कर सकते हैं।  इसीलिए कम आयरन वाले फार्मूला मिल्क ज्यादा समय तक शिशु को ना दें।  इसकी बजाये जैसे ही शिशु का कब्ज की समस्या समाप्त होती है उसे  फिर से साधारण फार्मूला मिल्क देना शुरू कर दीजिए जिसमें  उचित अनुपात में आयरन की मात्रा मौजूद हो। 
  9. अब जो टिप्स हम आपको बताने जा रहे हैं यह नवजात शिशु के लिए नहीं बल्कि थोड़े बड़े बच्चों के लिए है जिन्होंने ठोस आहार ग्रहण करना शुरू कर दिया है।  6 माह से बड़े बच्चे जो कब्ज की समस्या से परेशान हैं - आप उन्हें आहार में सेब और नाशपाती खाने को दे सकती हैं।  फलों में फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो शिशु को कब्ज की समस्या से राहत पहुंचाता है। 
  10. 6 महीने से बड़े बच्चों को कब्ज की समस्या से बचाने के लिए आपने चावल की जगह बाजरे का बना आहार भी दे सकती है।  बाजरा कब्ज को कम करने के लिए जाना जाता है। 

ऊपर बताए गए घरेलू नुस्खों के द्वारा शिशु का कब्ज ठीक नहीं हो रहा है तो आपको किसी बाल रोग विशेषज्ञ की राय अवश्य लेनी चाहिए जिससे कब्ज की समस्या का उचित समाधान निकल सके और शिशु के कब्ज की समस्या को ठीक किया जा सके। 

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