Category: शिशु रोग

7 Tips - शिशु को सर्दी के मौसम में बुखार से बचाएं इस तरह

By: Salan Khalkho | 4 min read

सर्दी और जुकाम की वजह से अगर आप के शिशु को बुखार हो गया है तो थोड़ी सावधानी बारत कर आप अपने शिशु को स्वस्थ के बेहतर वातावरण तयार कर सकते हैं। शिशु को अगर बुखार है तो इसका मतलब शिशु को जीवाणुओं और विषाणुओं का संक्रमण लगा है।

7 Tips - शिशु को सर्दी के मौसम में बुखार से बचाएं इस तरह

ठण्ड का मौसम जहाँ गर्मियों से छुटकारा दिलाता है वहीँ, बच्चों के लिए कुछ और समस्या भी लेके आता है।

ठंडियों के मौसम में बच्चे बहुत आसानी से बीमार पड़ जाते हैं। 



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इसीलिए सर्दियों का मौसम माँ-बाप के लिए विशेषकर बहुत चुनौतिपूर्ण होता है। 

आप को हर तरह से यह सुनिश्चित करना होता है की कहीं आप के बच्चे बीमार न पड़ जाएँ। 

लेकिन सारी सावधानियों के बाद भी बच्चे बीमार पड़ ही जाते हैं। चाहे आप जो भी कर लें लेकिन सर्दी, जुकाम और बंद नाक की समस्या से आप बच्चों को नहीं बचा सकती हैं। 

जन्म के पहले तीन साल बच्चे लाख जतन के बाद भी आसानी से बीमार पड़ जाते हैं। बच्चों का रोग प्रतिरोधक तंत्र बहुत कमजोर होता है। 

लेकिन हर बार बीमारी के ठीक होने के बाद बच्चों का रोग प्रतिरोधक तंत्र पहले से ज्यादा मजबूत हो जाता है। 

बच्चों का रोग प्रतिरोधक तंत्र बहुत कमजोर होता है

बच्चों के सर्दी, खांसी और जुकाम पे मैंने विस्तार से लेख लिखा है जिसे आप यहां पढ़ सकती हैं। लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

इस लेख में हम चर्चा करेंगे की किस तरह से आप अपने बच्चे को सर्दियों में बुखार से बचा सकती हैं। 

यह लेख हम सर्दियों के मौसम में विशेषकर उन माँ-बाप के लिए ले के आएं है जो ठण्ड के दिनों में अपने बच्चों को बुखार से बचाना चाहते हैं। 

शिशु को अगर बुखार है तो इसका मतलब शिशु को जीवाणुओं और विषाणुओं का संक्रमण लगा है। 

हम आप को बताने जा रहे हैं कुछ सावधानियां, जिनका अगर आप ध्यान रखें तो आप के बच्चे स्वस्थ रहेंगे और बीमार भी कम पड़ेंगे।  हम आप को 7 Tips बताने जा रहे हैं जिनकी सहायता से आप अपने शिशु को सर्दी के मौसम में बुखार से बचा सकेंगी। लेकिन सबसे पहले सबसे जरुरी बात। आप अपने शिशु को समय पे सभी टिके लगवाएं। इससे आप का बच्चा बहुत से जानलेवा बिमारियौं से बचा रहेगा। 

बच्चों के हातों को साफ़ रखें

१. पहला - बच्चों के हातों को साफ़ रखें

बच्चों को बीमारी के चपेट में पड़ने से बचने का यह सबसे आसान और सबसे प्रभावी तरीका है। अगर बच्चों का हाथ साफ़ रहेगा तो उन्हें संक्रमण नहीं लगेगा। बच्चे खेलते खेलते दिन भर में कई बार अपने चेहरे को छूते हैं और हातों को मुँह में डालते हैं। बच्चों को नियमित तौर पे हाथ धोना सिखाएं। बच्चों को साबुन की मदद से हाथ कैसे अच्छी तरह धोते हैं - यह भी सिखाएं। बच्चों को बताएं की जब भी वे टॉयलेट (toilet) जाएँ, अपने हातों को अवशय धो लें।  

नाक छिनकना सिखाएं

२. दूसरा - नाक छिनकना सिखाएं 

नाक छिनकने के दुवारा संक्रमण दूसरों में बहुत तेज़ी से फैलता है। इसीलिए यह जरुरी है की बच्चों को सिखाया जाये की वे अपनी नाक को किस तरह से रूमाल के जरिये साफ़ करें ताकि उनके दुवारा संक्रमण दूसरों में न फैले। साथ ही नियमित रूप से हातों को साफ़ करते रहने से, संक्रमण की सम्भावना पूरी तरह से समाप्त हो सकती है। 

आहार और पानी न बाटें

३. तीसरा - आहार और पानी न बाटें

अपने सामानों को दूसरों में बांटना एक अच्छा संस्कार है। लेकिन जब वे बीमार हों तब - बिलकुल नहीं। अपने बच्चों को सिखाएं की वे अपने सभी सामानों को दुसरे बच्चों के साथ बाटें, लेकिन अपने आहार और पानी को छोड़ के। 

अपने बच्चों को यह भी बताएं की वे दुसरे बच्चों के आहार को या पानी को न पियें। कहीं ऐसा न हो की अनजाने में आप के बच्चे किसी बीमार बच्चे के साथ आहार और पानी साझा कर बैठें। आप के बच्चे न तो किसी को अपना आहार दें और न ही किसी दुसरे बच्चे का आहार खाएं। 

संतुलित आहार पे जोर दें

४. चौथा - संतुलित आहार पे जोर दें

संतुलित आहार एक बेहतर तरीका है संक्रमण से लड़ने का। आहार जिसमे Vitamin C भरपूर मात्रा में होती है, आप के शिशु के रोग प्रतिरोधक तंत्र (immune system) को मजबूत बनाती है। साथ ही शरीर को जल्द स्वस्थ होने में सक्षम बनाती है। बहुत सरे फल ऐसे हैं जैसे की संतरा और कीवी जिस में Vitamin C प्रचुर मात्रा में होता है। लेकिन संतुलित आहार का मतलब केवल Vitamin C तक ही सिमित नहीं है। संतुलित आहार से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी के लिए ये लेख पढ़ें। 

नियमित व्यायाम

५. पांचवा - नियमित व्यायाम

जा बच्चे नियमित तौर पे व्यायाम करते हैं उनका रोग प्रतिरोधक तंत्र (immune system) बहुत मजबूत रहता है। ये बच्चे बौद्धिक तौर पे भी बहुत मजबूत रहते हैं। अपने शिशु में नियमित व्यायाम का आदत डालिये। साथ में बच्चों को खेल कूद के लिए भी प्रेरित करें। 

जो बच्चे व्यायाम नहीं करते हैं, वे या तो बहुत वजनी होते हैं या फिर वे शारीरिक तौर पे बहुत कमजोर होते हैं। बच्चों के लिए यह दोनों ही स्थिति अच्छी नहीं है। ज्यादा वजनी होने से शिशु को तमाम तरह की बीमारियां घेरी रहेंगी। 

अत्यधिक वजन होने से शिशु को साँस लेने में भी कठिनाई होगी। तो आप अपने तरफ से यह कोशिश करें की आप के बच्चे का वजन उसके उम्र और उसके लम्बाई के अनुपात में हो। अगर आप के बच्चे का वजन सही है, तो वो आसानी से बीमार नहीं पड़ेगा।  आप के शिशु का सही वजन कितना होना चाहिए, इस calculator में पता करें।  

अगर आप के शिशु का वजन कम है तो भी स्वस्थ संबधी बहुत सी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए आप को शिशु का वजन बढ़ाने से सम्बंधित कारगर उपाय करने चाहिए। 

शिशु को पूर्ण आराम करने दें

६. छठा - शिशु को पूर्ण आराम करने दें 

आप की तमाम कोशिशों के बाद भी अगर आप का शिशु बीमार पड़ जाये तो आप उसे खूब आराम करने दें। सोते वक्त शरीर बहुत दक्षता के साथ संक्रमण से लड़ता है। सोते वक्त शरीर अपनी सारी ऊर्जा संक्रमण से लड़ने में इस्तेमाल करती है। 

बीमार पड़ने पे आप का शिशु जितना ज्यादा आराम करेगा, उतना जल्दी ठीक हो सकेगा। बाल शिशु रोग विशेषज्ञों की माने तो जो बच्चे कम उम्र में ज्यादा संक्रमण के संपर्क में आते हैं (यानी की ज्यादा बीमार पड़ते है), उनका रोग प्रतिरोधक तंत्र (immune system) औरों से ज्यादा मजबूत और बेहतर बनता है। 

अपने शिशु को घर पे रखें

७. सात - अपने शिशु को घर पे रखें

ऐसे बहुत से माँ-बाप हैं जो अपने बच्चों को पूर्ण रूप से ठीक होने से पहले ही स्कूल या day care भेज देते हैं। ये बिलकुल भी सही बात नहीं है। इससे दुसरे बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप का शिशु बीमार है तो जब तक की आप का शिशु पूरी तरह से स्वस्थ न हो जाये उसे स्कूल या day care न भेजें। 

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