Category: शिशु रोग

बच्चों में दमा का घरेलु उपाय, बचाव, इलाज और लक्षण

By: Salan Khalkho | 2 min read

बच्चों में अस्थमा के कई वजह हो सकते हैं - जैसे की प्रदुषण, अनुवांशिकी। लेकिन यह बच्चों में ज्यादा इसलिए देखने को मिलती है क्यूंकि उनका श्वसन तंत्र विकासशील स्थिति में होता है इसीलिए उनमें एलर्जी द्वारा उत्पन्न अस्थमा, श्वसन में समस्या, श्वसनहीनता, श्वसनहीन, फेफड़े, साँस सम्बन्धी, खाँसी, अस्थमा, साँस लेने में कठिनाई देखने को मिलती है। लेकिन कुछ घरेलु उपाय, बचाव और इलाज के दुवारा आप अपने शिशु को दमे की तकलीफों से बचा सकती हैं।

बच्चों में दमा का घरेलु उपाय, बचाव, इलाज और लक्षण

बच्चों में दमा के लक्षण

अगर आप को यह लगता है आप के शिशु को दमा है, तो हम आप को निचे कुछ लक्षण बता रहे हैं जिनकी सहायता से आप आसानी से यह पता लगा सकती हैं की आप के शिशु को दमा है या नहीं। 

  1. अगर आप के बच्चे को बहुत ज्यादा खांसी होती है या रात के समय आप के शिशु की खांसी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो यह अस्थमा का सामान्य लक्षण है। लगातार खांसी और खांसी का घम्भीर रूप शिशु में दमा की और इशारा करता है। 
  2. अगर साँस लेते वक्त आप अपने शिशु में घरघराहट की आवाज पायें - या - साँस छोड़ते वक्त सिटी की ध्वनि आये तो इसका मतलब है की आप के शिशु में निश्चित रूप से अस्थमा के लक्षण हैं। जिन बच्चों को अस्थमा की बीमारी होती है उन बच्चों में इस लक्षण को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अस्थमा होने पे वायुमार्ग संकुचित हो जाता है जिस वजह से शिशु को साँस लेने में दिक्कत होती है और साथ है जब शिशु अपनी साँस को छोड़ता है तो वायुमार्ग संकुचित होने की वजह से एक सिटी सी आवाज आती है। 
  3. दमा की समस्या होने पे वायुमार्ग संकुचित हो जाती जिस वजह से शिशु साँस लेने में बहुत कठिनाई होती है। अगर आप के शिशु को साँस लेने में कठिनाई हो रही है तो यह दमा का एक लक्षण हो सकता है। अस्थमा होने पे सांस उखड़ना या बच्‍चों में तेजी से सांस लेने की तकलीफ को देखा जा सकता है। 
  4. अगर आप का शिशु अपने दोस्तों के साथ खेलते समय असहज महसूस कर रहा है - उदहारण के लिए जल्दी-जल्दी थक जाना, हाफ़ने लगना आदि। अस्थमा होने पे बच्चों में एनर्जी की कमी पाई जाती है। यह भी अस्थमा का एक आम लक्षण है। 
  5. अगर आप का शिशु बार-बार सीने में जकड़न या चोट जैसे शिकायत करे तो  हो सकता है की यह लक्षण उसमें दमे की वजह से है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की हर बच्चे में दमे के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ बच्चों में एक से अधिक दमे के लक्षण दिख सकते हैं तो कुछ बच्चों में कम। अगर आप अपने बच्चे में दमे के किसी भी लक्षण को देखें तो तुरंत अपने शिशु के डॉक्टर से संपर्क करें।
  6. अगर माँ या बाप में से किसी को भी बचपन में अस्थमा था तो बच्चे में अस्थमा होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए अगर आप दोनों में से किसी को भी बचपन में अस्थमा था और आप अपने बच्च में इसके लक्षण देखे तो समझ लीजिये की आप के बच्चे को भी अस्थमा हो सकता है। 
  7. अस्थमा के लक्षण हर बच्चे में अलग-अलग हो सकते हैं। या फिर आप के बच्चे में हर बार अस्थमा के लक्षण अलग-अलग भी हो सकते हैं। 
  8. अगर आप रह रह कर अपने बच्चे में आचानक से खांसी या साँस फूलने की समस्या से जूझते देखें तो यह भी दमे की सम्भावना की तरफ इशारा करता है। 

यह जानना बहुत जरुरु है की अस्थमा के लक्षण आम सर्दी और जुखाम से बहुत मिलते जुलते हैं। अगर आप के बच्चे को बार-बार खांसी हो रही है या उसे बहुत तीव्र खांसी का सामना करना पड़ता है तो इसका मतलब यह जरुरी नहीं की आप के बच्चे को अस्थमा है। यह महज एक सम्भावना है और इसकी पुष्टि केवल डॉक्टर के दुवारा बताये गए जाँच के दुवारा ही हो सकती है।

बच्चों में दमा का घरेलु उपाय

बच्चों में दमा का घरेलु उपाय

अगर आप को अपने बच्चे में दमा ले लक्षण दिखें तो आप उसका घरेलु उपचार कर सकती हैं। अपने शिशु का घर पे किसी भी तरह का उपचार करने से पहले अपने शिशु के डॉक्टर की राय अवश्य ले लें। यह जरुरी नहीं की हर घरेलु इलग आप के शिशु के अस्थमा की बीमारी के लिए कारगर हो, लेकिन डोक्टर आप के शिशु के स्वस्थ से परिचित हैं इस लिए आप के शिशु की शारीरिक अवस्था के अनुसार उचित राय दे सकते हैं। यह हम आप को बताने जा रहे हैं कुछ घरेलु उपाय जिनकी सहायता से आप अपने बच्चे का घर पे ही दमे का इलाज कर सकती हैं। 

  1. अपने शिशु के आहार पे विशेष ध्यान दें। अगर आप का शिशु स्तनपान पे आधारित है तो उसे केवल अपना दूध पिलायें। गाए या बकरी का दूध ना दें। अगर आप का शिशु छेह महीने से बड़ा है तो ठोस आहार के रूप में मेवे और  अंडे नहीं दें। अपने शिशु को चीनी भी नहीं दें। अपने शिशु कोई भी ऐसा आहार नहीं दें वसायुक्त हो। अपने शिशु को ठंडा आहार भी नहीं दें जैसे की आइसक्रीम।
  2. अपने शिशु को आहार में साबुत आनाज, सूप, मौसम के अनुसार उपलब्ध फल और सब्जियां अपने शिशु को दें। सप्ताह में एक बार या महीने में दो बार अपने शिशु को मछली दें। 
  3. अपने शिशु पे बहुत ध्यान दें। पता करें की किन-किन वजह से आप के शिशु का अस्थमा की परेशानी बढ़ जाती है। अपने शिशु को उन वजहों से दूर रखें। 
  4. दमा को तुरंत नियंत्रित करने में इन्हेलर बहुत कारगर है। अपने शिशु के पास हमेशा इन्हेलर रखें तथा घर में सभी को इन्हेलर के इस्तेमाल की जानकारी दें ताकि आवश्यकता के समय आप के शिशु को तुरंत सहायता मिल सके। गंभीर परिस्थितियौं में दम जानलेवा भी हो सकता है। 
  5. घर के वातावरण को साफ़ और गरम रखें। ठण्ड की वजह से भी आप अपने शिशु में दमा के लक्षणों को देख सकती हैं।
  6. आप के शिशु का डॉक्टर जो भी सावधानी बरतने को बोले और जो भी दवाइयां इस्तेमाल करने का सुझाव दें - उसका पालन करें।    
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