बच्चों में खाने से एलर्जी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2050 तक दुनिया के लगभग आधे बच्चों को किसी न किसी प्रकार की एलर्जी होगा। जन्म के समय जिन बच्चों का भार कम होता है, उन बच्चों में इस रोग की संभावना अधिक होती है क्यों कि ये बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे आम दमा, एक्जिमा, पित्ती (त्वचा पर चकत्ते) और भोजन से संबंधित हैं।

बच्चों में खाने से होने वाली एलर्जी भी काफी बढ़ गयी है

आप अपने बच्चे के वृद्धि और पोषण के लिए सजग और जागरूक रहती हैं, लेकिन यही सजगता कभी - कभी पोषण की जगह किसी अनावश्यक नुकसान का कारण भी बन जाती हैं, जो आपकी समस्या को बढ़ा देती है। 

आपको यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि आपके बच्चे के लिए कौन सा आहार उपयोगी है जो उसको स्वस्थ रख सके।

इस लेख में आप सीखेंगे - You will read in this article

  1. ~~~#1^^^बच्चों में एलेर्जी विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार @@@
  2. ~~~#2^^^माँ के दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता है@@@
  3. ~~~#3^^^फ़ूड एलर्जी के लक्षण@@@
  4. ~~~#4^^^फ़ूड एलर्जी के कारण@@@
  5. ~~~#5^^^फ़ूड एलर्जी से बचने के उपाय@@@
  6. ~~~#6^^^Video: फ़ूड  एलेर्जिक बच्चों का दिनचर्या@@@

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anchorlink[1]anchorclose बच्चों में एलेर्जी विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार - Allergy in children according to World Health Organizations 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2050 तक दुनिया के लगभग आधे बच्चों को किसी न किसी प्रकार की एलर्जी होगा। डब्लूएचओ के अनुसार बच्चों में खाने से होने वाली एलर्जी भी काफी बढ़ गयी है। यह बीमारी भी अब पश्चिम तक सीमित न रहकर बड़ी तेजी से वैश्विक बीमारी बनती जा रही है। 

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भारत भी इस मामले में पीछे नहीं है। लड़कों में लड़कियों के मुकाबले आनुवंशिक रूप से यह एलर्जी होने की आशंका ज्यादा होती है। जन्म के समय जिन बच्चों का भार कम होता है, उन बच्चो में इस रोग की संभावना अधिक होती है क्यों कि ये बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे आम दमा, एक्जिमा, पित्ती (त्वचा पर चकत्ते) और भोजन से संबंधित हैं।

बच्चों में खाने से एलर्जी

anchorlink[2]anchorclose माँ के दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता है - Mother's milk improves child's immunity power

जब बच्चा सिर्फ माँ के दूध पर आश्रित रहता है तो, वह स्वस्थ रहता है लेकिन जब आप उसे खाने की कुछ चीज़े अलग से देती हैं, तो वह बच्चे को पोषण देता है परंतु उसी आहार से उसके शरीर में कोई बाहरी पदार्थ आता है तो उसका इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) शरीर की अन्य बीमारियों से लड़ने के बजाय उस पदार्थ के प्रति अत्यधिक सेंसेटिव हो कर गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगता है। इसी से उसमें एलर्जी के लक्षण दिखने लगते है। साधारणतः इसके लक्षण अलग अलग तरह से प्रकट होते है। कभी - कभी दो या तीन दिनों बाद भी एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं। इसकी प्रतिक्रिया रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर होती है। कुछ बच्चों को गेहूं, अंडा, मछली तथा अंगूर से भी एलर्जी होती है। 

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फ़ूड एलर्जी के कारण

जिस चीज़ से बच्चे को एलर्जी होती है उसके खाते ही उसमें निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

anchorlink[3]anchorclose फ़ूड एलर्जी के लक्षण - Symptoms of allergy

  1. बार बार उल्टी होना 
  2. दस्त होना
  3. जी मिचलाना
  4. शरीर पर चकत्ते हो जाना 
  5. छोटे छोटे लाल दाने निकल आना
  6. चक्कर आना 
  7. बेहोश होना 
  8. दिल का दौरा
  9. ब्लड प्रेशर कम हो जाना 
  10. आँख या जीभ में सूजन आ जाना 
  11. मुँह में खुजली होना
  12. साँस - नली में रूकावट

आपके बच्चे में यदि यह लक्षण दिखते हैं तो समझ लीजिये कि उसे खाने की कोई चीज़ नुकसान की है, जिसके फलस्वरूप बच्चा बीमार हो गया है।

फ़ूड एलर्जी के लक्षण

anchorlink[4]anchorclose फ़ूड एलर्जी के कारण - Causes of food allergy

फ़ूड एलर्जी का सबसे बड़ा कारण बदलते हुए मौसम में बाहर का खाना प्रयोग करना होता है, इसके अलावा कुछ रासायनिक परिवर्तन जो कि पशुओं, कीटपतंगों, धूल के कणोंआदि के माध्यम से होते है। बासी या बहुत देर का बना हुआ खाना भी बच्चे को रियेक्ट कर देता है।

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बच्चे के वृद्धि और पोषण

anchorlink[5]anchorclose फ़ूड एलर्जी से बचने के उपाय - Ways to prevent food allergy in children

  • अगर आपके बच्चे में कुछ एलर्जी के लक्षण दिखाई पड़ते हैं तो यह याद करने  की कोशिश कीजिये कि बच्चा ऐसी कौन सी चीज़ खाया है जो उसको नुकसान कर गयी है।
  • जिन चीज़ों से आपके बच्चे को एलर्जी होती है, आप उसे उन चीज़ों से दूर रखने की कोशिश करें।
  • बच्चे की एक फ़ूड डायरी बनाए, जिसमें सुबह से रात तक का पूरा विवरण लिखें कि उसे खाने में किस समय क्या दिया गया और वह खाना किन चीज़ों से मिल कर बना था। इससे उसके उपचार में सहायता मिलेगी।
  • जिन बच्चों को दूध, अंडे, गेहूं अथवा न्यूट्रीला से एलर्जी है, अगर वह चार से पांच साल की उम्र तक इन चीजों का सेवन न करें तो बाद में यह समस्या खत्म हो जाती है, लेकिन मूंगफली, नट्स और शेलफिश की एलर्जी सारी उम्र रहती है।
  • बच्चे में एलर्जी का लक्षण दिखाई देते ही उसका परीक्षण कराएं और किसी अनुभवी डॉक्टर से उसका उपचार कराएं।

फ़ूड एलर्जी से बचने के उपाय

anchorlink[6]anchorclose Video: फ़ूड  एलेर्जिक बच्चों का दिनचर्या - Food allergic children talk about their daily life

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