Category: बच्चों की परवरिश

10 आसान तरीके बच्चों को अच्छे संस्कार देने के

By: Vandana Srivastava | 7 min read

अपने बच्चे के व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आपको उसकी शिक्षा – दीक्षा , अच्छी आदतों तथा नैतिक मूल्यों के साथ - साथ इन संस्कारो को बचपन से ही उनके अंदर डालना चाहिए , तभी युवा होकर वह एक अच्छा इंसान बनेगा और अपने देश का एक अच्छा नागरिक।

बच्चों को दें अच्छे संस्कार how to teach children good manners

जब बच्चा जन्म लेता है, तभी से उसकी सीखने के प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है। परिवार बच्चे की प्रथम पाठशाला है , 

जहाँ से वह अच्छे  संस्कार सीखता है। 

माँ उसकी पहली गुरु होती है। माता - पिता का यह दायित्व होता है की वह अपने बच्चे को संस्कार वान बनाये। 

अपने बच्चे में अच्छे  संस्कार का बीजारोपड़ करने के लिए आपको भी एक अच्छा  इंसान बनना होगा। जिससे आपका बच्चा आपको ही अपना मार्गदर्शक और आदर्श मान सके। 

आइये अब हम आपको ऐसे दस अच्छे संस्कार के बारे में बताते है

  1. ईश्वर में आस्था
  2. माता - पिता का सम्मान करना
  3. सत्यनिष्ठा और ईमानदारी
  4. सहयोग की भावना
  5. कर्तव्यनिष्ठा की भावना
  6. प्रेम की भावना
  7. देश के प्रति सम्मान
  8. सहनशक्ति
  9. उज्जवल चरित्र
  10. बुजुर्गों के प्रति सकारात्मक सोच

ईश्वर में आस्था praying to God

1. ईश्वर में आस्था - Teach children gratitude and prayer

अपने बच्चे में यह संस्कार पैदा करना चाहिए की वो ईश्वर में विश्वास रखें। ईश्वर में आस्था रखने से सही काम करने की प्रेरणा मिलती हैं।उसको यह विश्वास दिलाइये की ईश्वर सब कुछ देखता हैं हमें अच्छे कर्म करना चाहिए।

 

माता - पिता का सम्मान करना respect parents

2. माता - पिता का सम्मान करना - Respecting and obeying parents

प्रत्येक बच्चे को बचपन से ही यह शिक्षा मिलनी चाहिए की वो अपने माता - पिता का सम्मान करे क्योकि माता - पिता ही उसके मार्गदर्शक होते हैं। कोई भी कार्य करने से पहले अपने माता - पिता की राय अवश्य जाने। अपने बच्चे को अपनी वास्तविक स्थिति के बारे में अवश्य बताए , जिससे वह आपका सम्मान करेगा। आदर्श और वीर बच्चों की कहानियाँ सुनाये और पढ़ने के लिए प्रेरित करें। जैसे श्रवण कुमार की कहानी।

सत्यनिष्ठा और ईमानदारी teach children honesty

3. सत्यनिष्ठा और ईमानदारी - Honesty

अपने बच्चे के अंदर सत्य बोलने की आदत डालनी चाहिए इसके लिए माता -पिता को स्वयं भी इस रास्ते पर चलना होगा। ईमानदारी की आदत डालनी होगी उनको यह बताना होगा की सत्य और ईमानदारी के रास्ते पर चलने पर ही आगे बढ़ा जा सकता हैं क्योंकि ईमानदारी की नीव बहुत मजबूत होती हैं। आगे चलकर कोई भी आप के बच्चे को पथ - भ्रष्ट नहीं कर सकता हैं। इसके लिए आप उसे किसी कहानी के माध्यम से या किसी उद्धरण के माध्यम से समझा सकते हैं। जैसे राजा हरिश्चंद्र की कहानी।

सहयोग की भावना - tech children to help others

4. सहयोग की भावना - Helping others

अपने बच्चे के अंदर सहयोग और दूसरों की मदद करने की भावना का संचार करना चाहिए। यह आदत बचपन से ही पड़नी चाहिए। एक माता - पिता होने के नाते आप अपने बच्चे को छोटे पर से ही अपने साथ काम पर लगाए या उसको बताते रहे की परिवार में सभी काम एक दूसरे के मदद से ही संभव हैं। घर में जितने भी सदस्य हैं उनके कार्य क्षमता के अनुसार सभी काम बाट दें जिससे उसको जिम्मेदारी का अहसास होगा और धीरे - धीरे एक दूसरे की मदद करना उसके आदत में शामिल हो जाएगा और वह बाहर वालो के साथ भी यही व्यवहार करेगा।

कर्तव्यनिष्ठा की भावना duty towards family

5. कर्तव्यनिष्ठा की भावना - Sense of duty

अपने बच्चे में यह संस्कार डालेकी वह कर्तव्यनिष्ठ हो। प्रत्येक व्यक्ति का अपने परिवार के प्रति , देश के प्रति , अपने गुरु के प्रति , अपने स्कूल के प्रति , अपने बड़ो और छोटो के प्रति अलग - अलग कर्तव्य होते हैं जिसे , उसे निभाना पड़ता हैं।

प्रेम की भावना feeling of love and empathy

6. प्रेम की भावना - Sense of love

प्रत्येक बच्चे के अंदर यह नैसर्गिक गुण होना चाहिए की वो सभी के साथ प्रेम से रहे। आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना के बल पर वह अपने परिवार , विद्यालय और समाज में प्रतिष्ठित स्थान पा सकता हैं। सभी उसे पसंद करेंगे और वह सभी के दिलों पर राज करेगा। उसे सभी के प्रति सहानभूति और करुणा की भावना  भी रखनी चाहिए। जैसे - गरीब ,बेसहारा , अनाथ , अपंग आदि।

देश के प्रति सम्मान - respect for nation

7. देश के प्रति सम्मान - Respect and duty towards the nation

प्रत्येक बच्चे के अंदर देश भक्ति की भावना होनी चाहिए।बचपन से ही बच्चे के अंदर यह संस्कार डाले की उसका सबसे पहला कर्त्तव्य अपने देश के प्रति हैं उसके अंदर देश के प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए। उसे प्रत्येक पल अपने देश के प्रति सेवा करने के लिए तत्पर होना चाहिए , हो सके तो उसे सैन्य शिक्षा के लिए प्रेरित करे। देश - भक्ति की कविता और कहानियाँ सुनाये। आदर्श व्यक्तियों के जीवन - चरित्र के बारे में जानने के लिए जागरूक करे।  

सहनशक्ति tolerance in children

8. सहनशक्ति - Tolerance 

आज - कल के दौर में बच्चों के पास सहनशक्ति का अभाव हैं , इस लिए माता -पिता होने के नाते आप अपने बच्चे के अंदर पेशेंस रखने की आदत डाले क्योंकि उसके आगे के जीवन के लिए यह गुण होना आवश्यक हैं। उसको यह सिखाये की छोटे - छोटे बातो पर वह उग्र न हो और जीवन के प्रति वह सकारात्मक रुख रखें।

उज्जवल चरित्र sound character in children

9. उज्जवल चरित्र - Fine character

अपने बच्चे के अंदर यह संस्कार डाले की वह अपने चरित्र के प्रति सजग रहे , क्योंकि एक बार चरित्र नष्ट होने पर वह दुबारा ठीक नहीं हो सकता। इस  धोखे और फरेब की दुनिया में वह अपने आस - पास के लोगो और फरेबी दोस्तों से सावधान रहे। 

10. बुजुर्गों के प्रति सकारात्मक सोच - Respect and empathy towards old people

अपने बच्चों को घर के बड़े - बुजुर्गों की इज़्ज़त करना सिखाए , उनकी सेवा करना ,उनकी बात मानना , उनकी मदद करना तथा उनका सम्मान करना उनको आना चाहिए।

बुजुर्गों के प्रति सकारात्मक सोच empathetic thoughts towards elders

अपने बच्चे के व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आपको उसकी शिक्षा – दीक्षा ,  अच्छी आदतों तथा नैतिक मूल्यों के साथ - साथ इन संस्कारो को बचपन से ही उनके अंदर डालना चाहिए , तभी युवा होकर वह एक अच्छा इंसान बनेगा और अपने देश का एक अच्छा नागरिक बनेगा , क्योंकि एक संस्कारी और बुद्धिमान बच्चा ही भावी पीढ़ी का निर्माता हैं।

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