Category: शिशु रोग

बच्चे के पीठ दर्द को नजर-अंदाज न करें

Published:29 Aug, 2017     By: Salan Khalkho     5 min read

पीट दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए| आज के दौर में सिर्फ बड़े ही नहीं बच्चों को भी पीठ दर्द का सामना करना पद रहा है| नाजुक सी नन्ही उम्र से ही बच्चों को अपने वजन से ज्यादा भारी बैग उठा के स्कूल जाना पड़ता है|


बच्चे के पीठ दर्द को नजर-अंदाज न करें do not ignore children back pain

विश्व भर में हो रहे शोध में तो एक बात तय है की बच्चों के पीठ दर्द को नजरअंदाज करना, बच्चों के बाद की सेहत के लिए अच्छा नहीं है। ये आगे चलकर बच्चों के लिए जिंदगी भर के लिए तकलीफ बन सकता है। स्वस्थ बच्चों की परवरिश के लिए आप को कई बातों का ख्याल रखना पड़ेगा। 

आम तौर पर बड़े लोगों को ही पीट दर्द की समस्या से जूझते देखा गया है। मगर इस बदलते परिवेश में पीठ दर्द ने एक बीमारी का रूप ले लिए है और हमारे समाज पे इस तरह हावी हो गया है की अब सिर्फ बड़े ही नहीं वरन बच्चे भी पीठ दर्द की शिकायत करने लगे हैं। 

सबसे पहली बात तो हमे यह समझने की है की पीठ दर्द कोई आम या साधारण बात नहीं है। पीठ दर्द की समस्या होने पे डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए और अपने डॉक्टर के सुझाव पे शारीरिक जांच करवानी चाहिए। बड़ों में पीठ दर्द की समस्या बहुत से कारणों से हो सकता है। और इसी लिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आज के दौर में सिर्फ बड़े ही नहीं बच्चों को भी पीठ दर्द का सामना करना पद रहा है। - जी हाँ इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। 

बच्चे पीठ दर्द की समस्या की शिकायत

अगर बच्चे पीठ दर्द की समस्या की शिकायत करें तो क्या? 

हमारी सभ्यता और मानव समाज ने इतनी तरकी कर ली है की आज बच्चों का बचपना कहीं गुम सा हो के रह गया है। हम चाहते हैं अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढाए, इसका नतीजा यह होता ही की नाजुक सी नन्ही उम्र से ही बच्चों को अपने वजन से ज्यादा भारी बैग उठा के स्कूल जाना पड़ता है। ये सब सिर्फ इसलिए ताकि जिंदगी की दौड़ में वे कहीं पीछे न छूट जाएँ। इसका नतीजा, बच्चों में तरह तरह की समस्याएं। 

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कुछ दशक पहले बच्चों में पीठ दर्द की समस्या होना एक दुर्लभ बात थी। आज ये एक आम बात हो गया है। अगर आप का बच्चा पीठ दर्द की शिकायत करे तो तुरंत उसकी डॉक्टरी जाँच (चिकित्सीय जाँच) करवाएं। अगर बच्चे का पीठ दर्द के साथ-साथ वजन भी घट रहा है,  और वो पैरों में कमजोरी, पेशाब में दिक्कत, लेटने व उठने पर दर्द की समस्या की भी शकायत कर रहा है तो आप को सावधान हो जाना चाहिए और तुरंत डाक्टर के परामर्श के अनुसार इलाज करवाना चाहिए। 

बच्चों में पीठ दर्द की समस्या मुख्या रूप से स्कूल का भारी-भरकम बैग उठाने से होता है। स्कूल का भारी बच्चों की रीढ़ की हड्डी पे दबाव बनता है और यही दबाव कई दिनों तक बना रहे तो यह बच्चों में पीठ के दर्द की समस्या को जन्म देता है। मगर बच्चों में पीठ दर्द हमेशा स्कूल का भारी उठाने से नहीं होता है, इसके और भी कई कारण हो सकते है जैसे की बच्चे की शारीरिक संरचना में आयी विकृति। इसका पता कुछ हद तक एक्सरे के जरिये डॉक्टरी जाँच में लग जाता है। 

कई बार जब बच्चे पौष्टिक आहर ग्रहण नहीं करते तो भी उनमें पीठ दर्द की समस्या हो सकती है। उद्धरण के तौर पे यह पाया गया है की अगर पौष्टिक आहार न लिया जाये तो स्पाइन इंफेक्शन की समस्या बढ़ सकती है। बच्चों में पीठ दर्द की समस्या का कारण रीढ़ की हड्डियों की टी.बी भी पाया गया है। इसे रूकने के लिए सरकार कई ठोस कदम उठा रही है। 

बच्चों मैं पीठ दर्द को रोकने के उपाय how to prevent back pain in children

बच्चों मैं पीठ दर्द को रोकने के उपाय


सही तरीके से बैठना, खड़े रहना या चलना (maintaining right posture)

अधिकांश लोगों को बैठने की सही अवस्था का ज्ञान नहीं है। यश भी एक मुख्या कारण है बड़ों और बच्चों में पीठ की दर्द का। जब भी आपका बच्चा टीवी देखने के लिए बैठे या कंप्यूटर पे काम करने के लिए बैठे तो उसे उसके पोस्चर (posture) पे विशेष ध्यान दें। पीठ दर्द की समस्या से बचने के लिए जरुरी है की आप का बच्चा प्रापर बैक रेस्ट के साथ बैठे।

नियमित व्यायाम

हर दिन व्यायाम करने से न केवल बच्चे का शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि कई प्रकर के बीमारियोँ से भी दूर रहता है और चुस्त दरुस्त रहता है। आपने बच्चे की नियमित रूप से वयवम (regular workout) करवाएं। इससे आप के बच्चे को पीठ दर्द की समस्या कम रहेगी। 

बच्चे का खानपान 

जो बच्चे दिन भर कुछ न कुछ खाते रहते हैं उनमे छोटी उम्र से ही जयादा होने की सम्भावना बनी रहती है। अधिक वजन तरह-तरह की बीमारियोँ को निमंत्रण देता है। इसी लिए कहा जाता है की अधिक वजन लाख बीमारियोँ का घर है। जरुरत से ज्यादा वजन बच्चे के रीढ़ की हड्डी पर भी दबाव बनता है जो आगे चल कर पीठ दर्द का कारण बन सकता है। बच्चों के लिए आहार खरीदते वक्त उसके डब्बे पे label अवश्य पढ़ लें। इससे पता चलेगा की बाजार से खरीदी सामग्री से कहीं आप के बच्चे को ज्यादा नमक, तेल या चीनी तो नहीं मिल रहा हैं। आप को यह जानना जरुरी है की कहीं आप अनजाने में अपने बच्चे को हानिकारक आहार तो नहीं दे रही हैं। सबसे बेहतर यह होगा की आप अपने बच्चों के लिए घर पे ही पौष्टिक आहार बनायें। पोषक तत्वों से भरपूर आहार 29 baby food recipes जो आप तुरंत घर पे बिना किसी तयारी के बना सकती हैं। 

ताजी फल व सब्जियां और पौष्टिक आहार दें बच्चे को give children healthy food 

स्वस्थ शारीरिक विकास

अगर आप चाहते हैं की आप के बच्चे का शारीरिक विकास सही दिशा में हो तो आप को ध्यान रखना पड़ेगा की आप का बच्चा शुरू से ही पौष्टिक आहार ग्रहण करे, और ताजी फल व सब्जियां खाये। ताजी फल व सब्जियां से बच्चे को जरुरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स मिलता है जो बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए जरुरी है। आप अपने बच्चे को पांच दलों से बनी खिचड़ी भी दे सकती हैं। इससे भी बच्चे को भरपूर पोषक तत्व मिलेंगे। आप के बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तो उसको पीठ दर्द की समस्या भी नहीं रहेगी। आप अपने बच्चे का नियमित रूप से मसाज कर सकती है। इससे बच्चे के शारीर को ताकत मिलता है। लेकिन मसाज करने से पहले ये सुनिश्चित कर ले की आप के बच्चे के मसाज के लिए कौन सा तेल सबसे उपयुक्त है। 

स्कूल बैग्स के कारण पीठ का दर्द

सुबह के वक्त सड़कों पे ये नजारा आम है जहाँ आप ने देखा होगा की जितना बच्चे का वजन नहीं है उससे ज्यादा वजन तो उसके बैग का है। समझा जा सकता है की क्या होगा इन बच्चों का। थोड़ी समझदारी के साथ आप चाहें तो बच्चे के बैग का वजन कम कर सकती हैं और साथ ही उसे दे सकती हैं पीठ दर्द से छुटकारा। बच्चे के स्कूल का टाइम टेबल (time table) देखें और उसी के अनुसार केवल उस दिन पढाये जाने वाले कॉपी और किताब बच्चे के बैग में डालें। इससे बच्चे के बैग का वजन कम रहेगा और से पीठ दर्द की समस्या भी नहीं रहेगी। 

अगर आप चाहती हैं की आप का बच्चा पीठ दर्द से दूर, स्वस्थ और चुस्त रहे तो, तो इन बातों का ख्याल रखें। 



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