Category: बच्चों की परवरिश

नव भारत की नई सुबह (कविता)

By: Vandana Srivastava | 2 min read

युवा वर्ग की असीमित बिखरी शक्ति को संगठित कर उसे उचित मार्गदर्शन की जितनी आवश्यकता आज हैं , उतनी कभी नहीं थी। आज युवा वर्ग समाज की महत्वकांशा के तले इतना दब गया हैं , की दिग - भ्रमित हो गया हैं।

सबसे युवा देश भारत का युवा वर्ग हो आगे ,

उसके भीतर छिपी शक्ति , नवसृजन हेतु अब जागे 



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सारा गगन नाप लेने की हो उमंग पाखो में 

इससे कम न उन्हें जीवन में कोई लक्ष्य सुहाये।

किसी भी राष्ट्र में क्रांति का सूतपात युवावर्ग ही करते हैं। यह क्रांति सामाजिक , राजनीतिक या व्यावसायिक किसी भी श्रेत्र में हो सकती हैं।

युवा वर्ग की असीमित बिखरी शक्ति को संगठित कर उसे उचित मार्गदर्शन की जितनी आवश्यकता आज हैं , उतनी कभी नहीं थी। आज युवा वर्ग समाज की महत्वकांशा के तले इतना दब गया हैं , की दिग - भ्रमित हो गया हैं।

 

हर किसी को ऊँची उड़ान भरना हैं , परन्तु यह उड़ान जमीन से होगी और जमीन पर ही रहकर होगी , यह बात हमारे बच्चे भूल गये हैं। हमें इस वर्ग को इस बात के लिए प्रेरित करना हैं की वे अपनी संस्कृति से जुड़े रहे , क्योंकिहमारी संस्कृति एक वट वृक्ष की तरह हैं , जिसकी जड़े बहुत दूर तक और गहराई तक फैली हैं। जिस तरह एक वृक्ष पुष्पित और पल्लवित होता हैं , वैसे ही हमारा युवा वर्ग भी अपनी सुगंध से चारों दिशाओं को सुगन्धित करे। प्राचीन संस्कृति और नई तकनीक ( टेक्नॉलॉजी ) से समाज को नई दिशा दे।  

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