Category: टीकाकरण (vaccination)

टीके के बाद बुखार क्यों आता है बच्चों को?

By: Salan Khalkho | 4 min read

टीकाकरण के बाद बुखार होना आम बात है क्यूंकि टिके के जरिये बच्चे की शरीर का सामना संक्रमण से कराया जाता है। जानिए की आप किस तरह टीकाकरण के दुष्प्रभाव को कम कर सकती हैं।

टिके बच्चों को जानलेवा बीमारियोँ से बचाते हैं मगर टिके के दुष्प्रभाव जैसे की बच्चों में बुखार तथा अन्य लक्षण देखने को मिलते हैं। यह एक आम समस्या है। 

यह इसलिए होता है क्यूंकि टीकाकरण (vaccination) में बच्चे के शरीर का सामना संक्रमण से कराया जाता है। इससे बच्चे में संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षण क्षमता विकसित होती है। 

मगर संक्रमण के कारण बच्चे को बुखार तथा अन्य side effect होने की सम्भावना रहती है। 



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आप इस लेख में पढेंगे:

  1. टीकाकरण से बुखार होने पे शिशु को क्या लाभ
  2. टीकाकरण क्यों है जरुरी
  3. टीकाकरण किस उम्र से बच्चों को लगाने चाहिए
  4. टीका (vaccination) किस तरह बच्चों को बीमारियोँ से बचाता है
  5. टीकाकरण के दुष्प्रभाव
  6. दुष्प्रभाव के लक्षण
  7. गंभीर अवस्था - कब डॉक्टर से संपर्क करें
  8. टीकाकरण (vaccination) से बुखार क्यों होता है
  9. टीकाकरण के तरीके
  10. टीकाकरण के दुष्प्रभाव को कैसे कम करें

टीकाकरण से बुखार होने पे शिशु को क्या लाभ 

  • बुखार होने पे शरीर का तापमान बढ़ जाता है यह एक तरीका है जिसके जरिये बच्चे का शरीर संक्रमण से लड़ता है। 
  • बुखार होने पे रक्त की सफ़ेद कोशिकाएं हरकत में आ जाती हैं। 
  • शरीर का तापमान रोगाणुओं और जीवाणुओं को बढ़ने से रोकता है। 
  • तीव्र चरण प्रतिक्रिया - यह शरीर का संक्रमण से लड़ने का प्रथम चरण है। 
  • शिशु को स्वस्थ होने में मदद करता है
  • शरीर की रक्षा करता है

 

टीकाकरण क्यों है जरुरी

टीकाकरण क्यों है जरुरी 

बच्चों का जन्म होते ही टीकाकरण सरणी के अनुसार टिका लगाना बहुत जरुरी है। टीकाकरण बच्चों को  अनेक प्रकार के जानलेवा बीमारियोँ से बचाते हैं। टीकाकरण से बच्चों का शरीर जन्दगी भर के लिए संक्रमण और कई भयंकर बीमारियोँ से लड़ने के काबिल हो जाता है। 

टीकाकरण किस उम्र से बच्चों को लगाने चाहिए 

टिके बच्चों को जन्म से ही लगने प्रारम्भ हो जाते हैं। जैसे की पोलियो, डी.टी.पी, चिकन पॉक्स और एम एम के टिके। बच्चों को सही समय पे "शिशु का टीकाकरण चार्ट" के अनुसार टिके लगवाने चाहिए ताकि बच्चे बीमारियोँ के खतरे से बचे रहें। 

टिके (vaccination) किस तरह बच्चों को बीमारियोँ से बचाता है 

बच्चों के जन्म के समय उनका शरीर इतना सक्षम नहीं होता की अनेक प्रकार के गंभीर बीमारियोँ से लड़ सके। जब तक बच्चे माँ का दूध पीते हैं तब तक बच्चों को दूध के जरिये माँ का antibody मिलता रहता है। माँ के शरीर से मिला antibody बच्चों को बीमारियोँ से लड़ने में मदद करता है। मगर ये एंटीबाडी जिंदगी भर बच्चे की रक्षा नहीं करेंगे। बच्चों के शरीर को खुद antibody बनाना शुरू करना पड़ेगा ताकि वो सवयं बीमारियोँ से लड़ सके। टीकाकरण बच्चे के शरीर को antibody बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। एक बार जब बच्चे का शरीर किसी विशेष प्रकार के जीवाणु/रोगाणु के प्रति antibody बनाना सिख लेता है तो फिर वो जिंदगी भर के लिए उस बीमारी से लड़ने में सक्षम हो जाता है। 

टीकाकरण के दुष्प्रभाव

टिके है बहुत जरुरी मगर हैं कष्टदायी। टीकाकरण के दुष्प्रभाव बच्चों में देखने को मिलते हैं।  जैसा की टिका लगाने (vaccination) के बाद अधिकांश बच्चों को हक्का फुल्का बुखार होता है। इसी लिए अगर टिके के बाद बच्चे को हल्का-फुल्का भुखार या कोई और समस्या हो तो कोई चिंता की बात नहीं। आमतौर पे ये दुष्प्रभाव और कष्ट 24 घंटे के अंदर दिखने शुरू हो जाते हैं। इस दौरान आप बच्चों में यह लक्षण देख सकते हैं। 

दुष्प्रभाव के लक्षण

  • हल्का फुल्का बुखार होना
  • जिस जगह पे injection दिया गया है उस जगह पे सूजन और दर्द तथा उस जगह का लाल हो जाना 
  • दस्त होना
  • त्वचा पे लाल चकते पड़ जाना 
  • भूख न लगना
  • बिना रुके रोते रहना 
  • चिड़चिड़ापन 

vaccination - बिना रुके रोते रहना

गंभीर अवस्था - कब डॉक्टर से संपर्क करें 

यूँ तो सभी टीकों से बुखार होने की सम्भावना रहती है। मगर आपको ध्यान रखना है की बच्चे को तेज़ बुखार न हो। अगर तेज़ बुखार हुआ तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कभी कभी तेज़ बुखार में बच्चों को दौरे भी पड़ने लगते हैं। यह स्थिति सही नहीं है। ये गंभीर अवस्था है। ऐसा होने पे डॉक्टर से संपर्क करें ताकि शिशु का तुरंत उपचार हो सक। 

vaccination के बाद बुखार क्यों आता है

टीकाकरण (vaccination) से बुखार क्यों होता है 

टीकाकरण के बाद बुखार होना आम बात है क्यूंकि टिके के जरिये बच्चे की शरीर का सामना संक्रमण से कराया जाता है। जब बच्चे का शरीर बहुत ही कमजोर संक्रमण से कराया जाता है तो उसका शरीर उस संक्रमण से लड़ने के लिए प्रतिरक्षण क्षमता (antibody) विकसित करता है।  

टीकाकरण के तरीके

बच्चों को सभी टीका injection के रूप में नहीं दिया जाता है। कुछ टिके drops के रूप में बच्चे के मुंह में दवा डालकर दिए जाते हैं।

  • Injection - डी.टी.पी, चिकन पॉक्स
  • Drops - रोटावायरस

टीकाकरण के तरीके

टीकाकरण के दुष्प्रभाव को कैसे कम करें

बच्चों को आप टीकाकरण के दुष्प्रभाव से तो नहीं बचा सकती हैं मगर आप टिके के दुषोरभाव को जरूर कम  कर सकती हैं। 

  • टिके की वजह से अगर सूजन हो गयी है तो सूजन वाली जगह के आस पास हल्के गुनगुने पानी से सिकाई कर कष्ट को कम कर सकती हैं। 
  • टीकाकरण से पहले और बाद में शिशु को स्तनपान कराएं। इससे बच्चे को आराम मिलेगा। 
  • आप बच्चे के ध्यान को इधर-उधर भटका के भी उसके तकलीफ को कम कर सकती हैं। 

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