Category: प्रेगनेंसी

गर्भपात के बाद गर्भधारण में का सही समय और ध्यान रखने योग्य बातें

By: Admin | 3 min read

गर्भपात बाँझपन नहीं है और इसीलिए आप को गर्भपात के बाद गर्भधारण करने के लिए डरने की आवश्यकता नहीं है। कुछ विशेष सावधानियां बारात कर आप आप दुबारा से गर्भवती हो सकती हैं और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। इसके लिए आप को लम्बे समय तक इन्तेजार करने की भी आवश्यकता नहीं है।

गर्भपात के बाद गर्भधारण में का सही समय और ध्यान रखने योग्य बातें

अगर हाल ही में आप का गर्भपात हुआ और आप पूर्ण रूप से स्वस्थ है तो आप गर्भपात के छेह महीनो के भीतर सुरक्षित रूप से गर्भवती हो सकती हैं। आप को लम्बे समय तक इन्तेजार करने की आवश्यकता नहीं है। 

गर्भपात की वजह से कुछ महिलाएं इतनी डर सी जाती हैं की वे दोबारा गर्भधारण करने से पहले बहुत इंतजार करती हैं। आप को न तो डरने और न ही घबराने की जरुरत है। 

गर्भपात के बाद भी आप दुबारा से गर्भवती हो सकती हैं और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। आप को इसके लिए एक लम्बे समय तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। 

गर्भपात के बाद छह महीने इंतजार

ब्रिटिश की एक यूनिवर्सिटी में हुए शोध ,में यह बात प्रमाणित हो गयी है की गर्भपात के बाद छेह महीनो के भीतर ही स्त्री फिर से गर्भवती हो सकती है, बिना किसी समस्या के।

शोध के निष्कर्षों के आधार पे जो महिलाएं गर्भपात के बाद दोबारा जल्दी गर्भवती होती हैं, उन महिलाओं के बच्चे जन्म के समय ज्यादा स्वस्थ पाए गए। 

इस लेख में:

गर्भपात के कितने समय बाद गर्भवती हों

गर्भपात के तीन महीनो के बाद आप फिर से कभी भी गर्भ धारण कर सकती हैं। तीन महीने इन्तेजार इसलिए जरुरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके की कही कोई इन्फेक्शन तो नहीं जिसका होने वाले बच्चे पे बुरा असर पड़े। 

लेकिन अगर हाल ही में हुए शोध के निष्कर्षों को देखे तो गर्भपात के तुरंत बाद भी स्वस्थ रूप से महिला गर्भ धारण कर सकती है। 

गर्भपात के बाद गर्भ धारण करने से पहले तीन महीनों का इस्तेमाल आप प्रसवपूर्व के फोलिक एसिड व अपनी सेहत को सुधारने के लिए कर सकती हैं। 

गर्भपात के छह महीनो के भीतर फिर से गर्भधारण

इस दौरान आप अपने डोक्टर की सलाह पे थायराइट व इन्सुलिन को जांच भी करा सकती हैं। बहुत सी महिलाओं में थायराइट व इन्सुलिन गर्भपात की आम वजह है। 

गर्भपात के बाद गर्भवती होने के लिए कब डोक्टर की सलाह लें

अगर ये आप का दूसरा गर्भपात है तो आप को गर्भवती होने का प्रयास करने से पहले डोक्टर की राय लेना महत्वपूर्ण है। 

डॉक्टर कुछ जाँच के दुवारा गर्भपात की वजह जानने की कोशिश करेंगे। एक बार गर्भपात की वजह पता चल जाने के बाद, डॉक्टर आप को गर्भवती होने के लिए जरुरी निर्देश दे सकते हैं।   

बार-बार गर्भपात से बचने का उपाय 

अगर आप को बार-बार गर्भपात की समस्या का सामना करना पद रहा है तो आप गर्भवती होने से पहले और गर्भवती होने के दौरान कुछ उपायों पे अमल कर सकती हैं:

  • अगर गर्भपात के बाद डॉक्टर आप के खून की जाँच (ब्लड टेस्ट) करने की सलाह देते हैं और जाँच में अगर आप का ब्लड ग्रुप नेगेटिव निकलता है, तो गर्भपात के बाद आप को एंटी-डी इंजेक्शन लेने की आवश्यकता है।  
  • केवल 1% महिलाओं को ही गर्भपात 2 से अधिक बार होता है। अगर आप का गर्भपात 2 से अधिक बार होता है तो आप को डॉक्टरी जाँच के आलावा अपने जीवनशैली में भी महत्वपूर्ण बदलाव करने की आवश्यकता है। 
  • आप अपने आप को तनाव से दूर रख कर भी गर्भपात की स्थिति से बचाव कर सकती हैं। 
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। व्यायाम करने से शरीर मजबूत बनेगा, आप का वजन नियंत्रण में रहेगा, आप का मानसिक तनाव भी कम होगा, आप ये माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद है। गर्भावस्था के दौरान कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से इसके बारे में सलाह ले लें। 
  • गर्भवती होने का प्रयास करने के कुछ महीनो पहले से ही फोलिक एसिड लेना शुरू कर दें। इससे आप के शरीर को गर्भ धारण करने के लिए अनुकूल माहौल मिलेगा तथा यह स्वस्थ बच्चे के लिए भी महत्वपूर्ण है। 

गर्भपात के कारणों की जाँच 

अगर गर्भपात एक बार से ज्यादा हो तो गर्भपात की वजह का पता करना जरुरी है ताकि दोबारा गर्भपात की स्थिति से बचा जा सके। 

अगर आप को गर्भपात की वजह का पता होगा तो आप आवश्यक सावधानियां बरत सकती हैं। गर्भपात की वजहों का पता लगाने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट यानी की खून की जाँच करने की सलाह दे सकते हैं। 

  • खून के जाँच से हॉर्मोन्स और प्रतिरोध छमता का पता लगाया जाता है। 
  • कुछ हालातों में डॉक्टर माता और पिता दोनों के खून की जाँच की सलाह दे सकते हैं। इस जाँच से गुणसुत्रों का पता लगाया जाता है। 
  • कई बार गर्भपात के बाद कोशिका की संरचना की जाँच भी की जाती है। 
  • गर्भ के स्वस्थ के बारे में पता करने के लिए डॉक्टर अल्ट्रा साउंड और सोनोहेस्टेरोग्राम की मदद भी ले सकते हैं। सोनोहेस्टेरोग्राम के जरिये गर्भाशय की परतों की जाँच की जाती है। 

गर्भपात के तुरंत बाद गर्भावस्था

गर्भपात बांझपन का कारण नहीं है। इसका मतलब अगर आप ने एक बार गर्भपात का सामना किया है तो जरूरी नहीं की अगली बार भी आप को गर्भपात का सामना करना पड़ेगा। नव विवाहित दम्पति कुछ सावधानियां बरत के गर्भपात की स्थितियों से बच सकते हैं। 

गर्भपात के तुरंत बाद भी आप गर्भवती हो सकती हैं क्योँकि गर्भपात के तुरंत बाद से ही महिला का शरीर अण्डोत्सर्ग उत्पन्न करना शुरु कर देता है। 

लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार गर्भपात के बाद स्त्री के शरीर को पूर्ण रूप से ठीक होने में कुछ महीनों का समय भी लग सकता है। इसके लिए तीन महीने उपयुक्त समय है। 

80% गर्भपात गुणसूत्र विपथन के कारण होते हैं। शुक्राणु को परिवर्तिन होने में 2.5 महीने का समय लगता है। लिहाजा दोबारा गर्भधारण करने से पहले तीन महीने इंतजार करना तर्कसंगत है। 

गर्भपात के तुरंत बाद शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है। पोषक तत्वों की इस कमी को पूरा करने में शरीर को कुछ समय भी लग सकता है। 

इसीलिए गर्भधारण करने से पहले शरीर को कम से कम तीन महीने देना महत्वपूर्ण है। 

क्योँ होता है गर्भपात - ये सावधानियां बरतें 

सावधानीपूर्वक चलें - गर्भपात के अधिकांश मामलों में गर्भवती महिला का गिरना या चाट लगना पाया गया है। गर्भपात से बचने के लिए गर्भवती महिला को संभल के चलना चाहिए, और अपन हर कार्य संभल के करना चाहिए ताकि हर प्रकार के चोट और दुर्घटना से बच सके। 

तनाव से दूर रहें - तनाव भी गर्भपात की मुख्या वजहों में से एक है। गर्भवती होने के बाद आप अपने आप को हर प्रकार के तनाव से दूर रखने की कोशिश करें। अच्छी किताबें पढ़ें, टीवी पे अच्छे कार्यक्रम देखें, टीवी पे न्यूज़ और मानसिक क्लेश देने वाले सीरियल से दूर रहें, ऐसे दोस्तों की संगती में रहें जो आप को खुश रखें। 

असुरक्षित सेक्स से बचे - गर्भवती होने के बाद असुरक्षित सेक्स से बचे। असुरक्षित सेक्स की वजह से बच्चे को गर्भ में संक्रमण लगने का खतरा रहता है। 

अधिक वजन न उठायें - कई बार गर्भवती महिला का गर्भपात इस वजह से हो जाता है क्योँकि उसने अधिक भर वाला सामन उठाया था। गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक वजन उठाने से बचें। 

अधिक उम्र तक इंतजार - जैसे जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है, उसके गर्भवती होने की सम्भावना भी कम होती जाती है। कुछ महिलाओं में अधिक उम्र का होने भी उनमें गर्भपात का कारण बनता है। 

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