Category: शिशु रोग

कैसे करे अपने शिशु के गर्भनाल की सही देखभाल

By: Salan Khalkho | 2 min read

जन्म के बाद गर्भनाल की उचित देखभाल बहुत जरुरी है। अगर शिशु के गर्भनाल की उचित देखभाल नहीं की गयी तो इससे शिशु को संक्रमण भी हो सकता है। नवजात शिशु में संक्रमण से लड़ने की छमता नहीं होती है। इसीलिए थोड़ी सी भी असावधानी बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

शिशु के गर्भनाल की सही देखभाल taking care of baby Umbilical cord

शिशु जब माँ के गर्भ में रहता है तो उसे माँ से पोषण गर्भनाल (Umbilical cord) के द्वारा मिलता है। 

बच्चा माँ से गर्भनाल के द्वारा जुड़ा रहता है। 

गर्भनाल शिशु के नाभि के से जुड़ा रहता है। 

जन्म के बाद गर्भनाल के कोई उपयोग नहीं रहता है और इसीलिए डॉक्टर जन्म के बाद इस काट कर एक चिमटी के सहारे बंद कर देते हैं।

कुछ सप्ताह बाद यह स्वतः सूख का गिर जाता है। 

गर्भनाल की उचित देखभाल बहुत जरुरी है। अगर शिशु के गर्भनाल की उचित देखभाल नहीं की गयी तो इससे शिशु को संक्रमण भी हो सकता है। 

नवजात शिशु में संक्रमण से लड़ने की छमता नहीं होती है। इसीलिए थोड़ी सी भी असावधानी बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। 


हम आप को इस लेख में बताएँगे की आप किस तरह अपने शिशु की गर्भनाल (Umbilical cord) को संक्रमण से बचा सकती हैं। 

नवजात बच्चे की गर्भनाल (Umbilical cord) करीब ढाई सेंटीमीटर लंबी होती है। शिशु के जन्म के बाद उसके गर्भनाल (Umbilical cord) को सूखने में करीब दो सप्ताह का समय लग जाता है। मगर इसे पूरी तरह सूखने में तक़रीबन महीने भर का समय लग जाता है। 


शिशु के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान अक्सर शिशु विशेषज्ञ बच्चे के गर्भनाल (Umbilical cord) पे नारियल का तेल लगाने को कहते हैं। आप अपने शिशु के गर्भनाल (Umbilical cord) पे नारियल का तेल रुई के पोहे की मदद से लगा सकती हैं। 

जब तक बच्चे का गर्भनाल (Umbilical cord) पूरी तरह न सूख जाये (जिमे महीने भर का समय लगता है) बच्चे की साफ़-सफाई में थोड़ी से भी लापरवाही बच्चे को बीमार (बहुत बीमार) कर सकती है। 

इस दौरान अगर आप को शिशु के गर्भनाल (Umbilical cord) पे कोई संक्रमण के लक्षण दिखाई  दें तो तुरंत अपने शिशु डॉक्टर से मिलें और उसकी राय लें। अगर आप इसे नजरअंदाज कर देंगी तो संभव है की शिशु को गंभीर संक्रमण का सामना करना पड़े। 


इसके आलावा अगर आप को शिशु के नाभि के आस पास सूजन दिखाई दे तो डॉक्टर से परामर्श करें। दूसरी बात - शिशु के नाभि के आस-पास की त्वचा को छूने से ही अगर आप का शिशु रोने लगे तो समझ लीजिये की शिशु संक्रमण के शुरुआती दौर में है। 

अगर शिशु को बार-बार बुखार हो जा रहा है तो भी आप तुरंत अपने शिशु के डॉक्टर से संपर्क करें और परामर्श लें। 

अपने शिशु को नहलाते वक्त हर संभव कोशिश करें की बच्चे के नाभि के चरों तरफ का हिस्सा सूखा रहे। इसके सूख जाने के बाद भी कुछ महीनों तक बच्चे के नाभि पे साबुन लगा कर रगड़ें नहीं। कहीं ऐसा न हो की वह जगह छील जाये और शिशु को संक्रमण के खतरे का सामना करना पड़े। 


वीडियो: कैसे करे अपने शिशु के गर्भनाल की सही देखभाल

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