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Category: बच्चों का पोषण

क्या 12 महीने के शिशु को full fat UHT milk दिया जा सकता है?

By: Salan Khalkho | 3 min read

बहुत सारे माँ बाप इस बात को लेकर परेशान रहते हैं की क्या वे अपने बच्चे को UHT milk 'दे सकते हैं' या 'नहीं'। माँ बाप का अपने बच्चे के खान-पान को लेकर परेशान होना स्वाभाविक है और जायज भी। ऐसा इस लिए क्यूंकि बच्चों के खान-पान का बच्चों के स्वस्थ पे सीधा प्रभाव पड़ता है। कोई भी माँ बाप अपने बच्चों के स्वस्थ के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता है।

UHT milk के बारे में सबसे पहले तो यह जान ले की आप अपने बच्चे को निसंकोच, बिना किसी चिंता के दे सकती हैं। UHT milk बच्चों के स्वस्थ के लिए बेहद सुरक्षित और स्वास्थवर्धक है। अगर आप का शिशु १२ महीने का हो गया है तो आप उसे UHT milk या गाए का दूध देना प्रारंभ कर सकती हैं। 12 महीने से पहले बच्चों को माँ के दूध के आलावा और कोई दूध नहीं देना चाहिए। जिन माओं का दूध बच्चों को पूरा नहीं पड़ता है या जो माताएं अपने बच्चों को किसी भी कारण से दूध पिलाने में आसमर्थ है वे अपने बच्चे को फार्मूला मिल्क दे सकती हैं।

UHT milk के बारे में इस लेख में हम आप को बताएँगे की क्योँ आप के बच्चे के लिए UHT milk बेहद सुरक्षित और स्वास्थवर्धक है।

क्या 12 महीने के शिशु को full fat UHT milk दिया जा सकता है

समय के साथ जैसे जैसे आप का बच्चा बड़ा होता है, आप पाएंगी की आप के बच्चे की शारीरिक गतिविधियाँ भी तेज़ हो जाती हैं। आप यह भी पाएंगी आप के बच्चे की बातों थोड़ी समझदारी वाली बातें भी झलकने लगेगी।

कभी कभी तो आप को अपने छोटे से बच्चों की बातों को सुन कर ताजुब भी होगा की के बड़ों की तरह इतनी समझदारी भरी बातें कैसे कर लेता।  यह सभी बातें इस तरफ इशारा  करती है  की आपके बच्चे का विकास  ठीक तरह से हो रहा। 

शिशु का प्रारंभिक विकास दर

जब आपका बच्चा 1 साल का उम्र पूरा करता है तो वो अपने जन्म की लंबाई की तुलना में 50%  ज्यादा बढ़ जाता है। इसी तरह से  जब आपका बच्चा  2 साल की उम्र पूरी करता है  तो वह अपने जन्म की लंबाई की तुलना में औसतन 75% ज्यादा बढ़ जाता है। 

यह सारे पहलू ऐसे हैं जो इस बात को बताते हैं कि आपके बच्चे की विकास सुचारू रूप से हो रहा है।  बच्चों के शारीरिक विकास के आधार पर  बच्चों के मानसिक विकास का अंदाजा लगाना मुश्किल है। 

बच्चों का मानसिक विकास और बोलने का कौशल

बच्चों की बातों में समय के साथ जो सुधार होता है उसके आधार पर आप बच्चों के मानसिक विकास  का अंदाजा लगा सकते हैं।  बच्चों के जन्म के पहले कुछ सालों में बच्चों का मानसिक विकास बहुत तीव्र गति से होता है। 

बच्चों पर हुए शोध में इस बात का पता लगा है कि जब बच्चे 2 साल की उम्र पूरी करते हैं तब उनके दिमाग का आकार जन्म के आकार से 3 गुना ज्यादा बढ़ जाता है।  साथ ही एक व्यस्क व्यक्ति के  दिमाग का 85 परसेंट पहुंच जाता है। 

दूध से पोषण और शिशु में ठोस आहार की शुरुआत

जब बच्चे 6 महीने की उम्र पूरा करते हैं तो उनमें ठोस आहार का शुरुआत कर दिया जाता है।  लेकिन फिर भी जब तक बच्चे 12 महीने के ना हो जाए तब तक स्तनपान या फार्मूला मिल्क है बच्चे का मुख्य आहार रहता है। 

स्तनपान या फार्मूला मिल्क से  बच्चों को उनके शारीरिक आवश्यकताओं तथा मानसिक आवश्यकताओं के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं। 

एक साल के शिशु के पोषण की आवश्यकता

1 साल का उम्र पूरा करने के बाद शिशु का शरीर इतना परिपक्व हो जाता है कि वह आसानी से ठोस आहार को बचा सके।  शरीर की आवश्यकताएं भी बढ़ती है।  

इस समय मात्र दूध शिशु के लिए पर्याप्त नहीं होता। शिशु के लिए ठोस आहार अब पोषण का मुख्या जरिया होता है। एक साल के बाद बच्चों को आप गाए का दूध दे सकती हैं। गाए का दूध अब आप का शिशु आसानी से पचाने में सक्षम हो जाता है। 

दूध का पोषण और शिशु का विकास

गाए के दूध में मिलने वाला पोषण बच्चों के विकास के लिए बहुत लाभकारी है। UHT milk में और गाए के दूध में कोई अंतर नहीं है। UHT milk को गाए के दूध से तयार किया जाता है। 

गाए के दूध से UHT milk को तयार करने के लिए उसे कुछ second के लिए एक निश्चित तापमान पे गरम किया जाता है। इससे गाए के दूध में मौजूद सभी कीटाणु मर जाते हैं - लेकिन गाए के दूध में मौजूद सभी पोषक तत्त्व सुरक्षित रहते हैं। इसकी वजह से UHT दूध को कई दिनों तक साधारण तापमान पे भी रखने से यह ख़राब नहीं होता है। UHT दूध को इस्तेमाल करने से पहले इसे खौलाने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। 

गाए के दूध की तुलना में UHT milk ज्यादा बेहतर

आप को शायद यह सुन कर ताजुब लगेगा की गाए के दूध की तुलना में UHT milk कहीं ज्यादा सुरक्षित और स्वास्थवर्धक है। ऐसा इस लिए क्यूंकि की घर पे गाए के दूध को बार - बार खौलाने से उसके अन्दर मौजूद पोषक तत्वो की संख्या में तेज़ी से गिरावट आती है। 

UHT milk में ऐसा नहीं होता है। इसे गाए के दूध से तयार करने के लिए ऐसे तकनिकी का इस्तेमाल किया जाता है जिससे गाए के दूध में मौजूद सभी पोषण तत्त्व सुरक्षित रहते हैं। 

विश्व स्वस्थ संघटन की राय

विश्व स्वस्थ संघटन WHO (World Health Organization) के अनुसार बच्चों को माँ का दूध २ साल तक पिलाते रहना चाहिए। माँ का दूध बच्चे को बहुत सारे जरुरी पोषक तत्त्व प्रदान करता है तथा बच्चे के अन्दर रोग-प्रतिरोधक छमता भी बढ़ता है। 

तो निष्कर्ष यह ही की बच्चे को १ साल से पहले केवल स्तनपान कराएँ या फार्मूला मिल्क दें। जब बच्चा १ साल से बड़ा हो जाये तो आप उसे गाए का दूध या UHT milk  ना प्रारंभ करें। गाए के दूध में या UHT milk में प्रचुर मात्र में पोषक तत्त्व होते है जो बच्चे के बढ़ते विकास के लिए बहुत जरुरी है। 

सारांश 

UHT milk में आप को गाए के दूध में मौजूद सभी पोषक तत्त्व मिलेंगे। सच बात तो यह है की UHT milk में आप को गाए के दूध से भी ज्यादा पोषक तत्त्व मिलेंगे क्यूंकि गाए के दूध को उबालते वक्त बहुत सारे पोषकतत्व नष्ट हो जाते हैं। 

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